शासकीय मुरम की पहाड़ी पर अवैध उत्खनन का आरोप, पहाड़ी समतल कर खेती की तैयारी; ग्रामीणों ने की निष्पक्ष जांच की मांग

नरवर (शिवपुरी) | संतोष शर्मा, संवाददाता
नरवर तहसील अंतर्गत ग्राम मुबारिकपुर में शासकीय भूमि पर स्थित मुरम की पहाड़ी पर कथित अवैध उत्खनन और संभावित अतिक्रमण का मामला सामने आया है। ग्रामीणों ने आरोप लगाया है कि ग्राम काली पहाड़ी निवासी नारायण रावत पुत्र राजाराम रावत द्वारा मुबारिकपुर के सर्वे क्रमांक 95 में दर्ज शासकीय मुरम की पहाड़ी से लंबे समय से बड़े पैमाने पर मुरम का अवैध उत्खनन कराया गया।
ग्रामीणों का दावा है कि बड़ी मात्रा में मुरम निकालकर ट्रैक्टर-ट्रॉलियों के माध्यम से बाजार में बेची गई, जिससे शासन को भारी राजस्व हानि हुई है और शासकीय भूमि का मूल स्वरूप पूरी तरह बदल गया है। उनका कहना है कि जो पहाड़ी पहले दूर से स्पष्ट दिखाई देती थी, वह अब लगभग समतल हो चुकी है।
ग्रामीणों के अनुसार अब उत्खनन के बाद उसी भूमि पर ट्रैक्टर से जुताई कर खेती की तैयारी की जा रही है। इससे आशंका जताई जा रही है कि शासकीय भूमि पर स्थायी कब्जा करने का प्रयास किया जा रहा है।
स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि पहले सरकारी भूमि से खनिज निकाल लिया जाए और बाद में उसे समतल कर खेती शुरू कर दी जाए, तो भविष्य में उस भूमि पर अवैध कब्जा स्थापित करना आसान हो जाता है। इसी कारण ग्रामीणों ने प्रशासन से तत्काल सीमांकन, राजस्व निरीक्षण तथा खनिज विभाग की संयुक्त जांच कराने की मांग की है।
ग्रामीणों ने यह भी मांग की है कि कथित रूप से निकाली गई मुरम की मात्रा, उसके परिवहन की प्रक्रिया तथा उत्खनन के लिए किसी वैध अनुमति की जांच की जाए। यदि अवैध खनन की पुष्टि होती है तो शासन को हुई राजस्व हानि का आकलन कर दोषियों से उसकी वसूली की जाए।
ग्रामीणों का कहना है कि समय रहते कार्रवाई नहीं हुई तो शासकीय भूमि पर स्थायी अतिक्रमण हो सकता है, जिससे भविष्य में सरकारी भूमि को मुक्त कराना कठिन हो जाएगा। उन्होंने जिला प्रशासन, राजस्व विभाग और खनिज विभाग से निष्पक्ष जांच कर दोषियों के विरुद्ध अवैध खनन, शासकीय संपत्ति को नुकसान पहुंचाने, राजस्व हानि और अतिक्रमण से संबंधित प्रावधानों के तहत सख्त कानूनी कार्रवाई की मांग की है।
ग्रामीणों ने यह भी दावा किया है कि संबंधित व्यक्ति पूर्व में भी खनन गतिविधियों को लेकर विवादों में रहा है। हालांकि, इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हो सकी है।
फिलहाल पूरे मामले पर प्रशासन की कार्रवाई का इंतजार है। यदि जांच में ग्रामीणों के आरोप सही पाए जाते हैं, तो यह नरवर क्षेत्र में शासकीय भूमि पर अवैध खनन और अतिक्रमण के गंभीर मामलों में शामिल हो सकता है।