सीधी में लोकायुक्त का बड़ा एक्शन: 3 हजार की रिश्वत लेते तहसील का चपरासी गिरफ्तार, अब पूरे सिस्टम पर उठे सवाल

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वारिसाना प्रकरण में कथित रिश्वत लेते रंगे हाथ पकड़ा गया कर्मचारी, कलेक्ट्रेट परिसर में हुई कार्रवाई; जांच के बाद ही सामने आएगी पूरी सच्चाई।

 

सीधी, 8 जुलाई 2026। सीधी जिले की गोपद बनास तहसील में बुधवार सुबह लोकायुक्त पुलिस रीवा की टीम ने भ्रष्टाचार के खिलाफ बड़ी कार्रवाई करते हुए तहसील कार्यालय में पदस्थ चपरासी दामोदर प्रसाद साकेत को कथित रूप से 3 हजार रुपये की रिश्वत लेते हुए रंगे हाथ गिरफ्तार किया। यह कार्रवाई कलेक्ट्रेट परिसर में सुबह करीब 10:30 बजे की गई, जिसके बाद राजस्व विभाग में हड़कंप मच गया।

प्राप्त जानकारी के अनुसार ग्राम खजुरी निवासी नागेंद्र तिवारी ने वारिसाना प्रकरण के निराकरण के लिए तहसील कार्यालय में आवेदन दिया था। आरोप है कि संबंधित कार्य कराने के बदले चपरासी ने 3 हजार रुपये की रिश्वत की मांग की। शिकायत मिलने पर लोकायुक्त रीवा ने सत्यापन के बाद योजनाबद्ध ट्रैप कार्रवाई की और आरोपी को कथित रूप से रिश्वत लेते हुए पकड़ लिया।

कार्रवाई के बाद लोकायुक्त की टीम आरोपी को सर्किट हाउस ले गई, जहां उससे पूछताछ और अन्य वैधानिक कार्रवाई की जा रही है।

क्या सिर्फ चपरासी तक सीमित है मामला?

इस कार्रवाई के बाद सबसे बड़ा सवाल यह उठ रहा है कि क्या एक चपरासी अपने स्तर पर किसी राजस्व प्रकरण का काम कराने के नाम पर रिश्वत ले रहा था, या फिर वह किसी बड़े अधिकारी अथवा कर्मचारी के लिए यह राशि एकत्र कर रहा था? इस संबंध में फिलहाल किसी अन्य अधिकारी या कर्मचारी की संलिप्तता की कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। ऐसे में पूरे मामले की निष्पक्ष और गहन जांच के बाद ही वास्तविक स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।

लगातार विवादों में राजस्व विभाग

सीधी का राजस्व विभाग पिछले कुछ समय से लगातार विवादों में बना हुआ है। हाल ही में कलेक्ट्रेट का चर्चित ‘बुलेट कांड’ सुर्खियों में रहा था। इसके बाद एक पटवारी का कथित ऑडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुआ, जिसमें कथित रूप से तहसील के बाबू और तहसीलदार को पैसे देने का जिक्र किया गया था। उस मामले में भी प्रशासन द्वारा कार्रवाई की गई थी। अब तहसील कार्यालय में रिश्वतखोरी के इस प्रकरण ने विभाग की कार्यप्रणाली पर एक बार फिर सवाल खड़े कर दिए हैं।

स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि भ्रष्टाचार पर प्रभावी अंकुश लगाना है तो केवल एक कर्मचारी पर कार्रवाई पर्याप्त नहीं होगी। जांच एजेंसियों को यह भी पता लगाना चाहिए कि कहीं इसके पीछे कोई संगठित तंत्र तो सक्रिय नहीं है।

फिलहाल लोकायुक्त की कार्रवाई जारी है। मामले में आगे की जांच और आधिकारिक निष्कर्ष आने के बाद ही पूरे घटनाक्रम की वास्तविक तस्वीर सामने आ सकेगी।

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