जांच रिपोर्ट की अनदेखी पड़ी भारी: वरिष्ठ सहकारी निरीक्षक रामकृष्ण उद्दे निलंबित

जिला ब्यूरो मनोज कुमार यादव
डिंडौरी, 01 जून 2026। कर्तव्यों के निर्वहन में गंभीर लापरवाही एवं उच्चाधिकारियों की जांच रिपोर्ट के विपरीत कार्रवाई करने के आरोप में वरिष्ठ सहकारी निरीक्षक रामकृष्ण उद्दे को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया गया है। जिला प्रशासन द्वारा जारी आदेश में उनके आचरण को शासकीय सेवा नियमों के विपरीत मानते हुए यह कार्रवाई की गई है।
प्राप्त जानकारी के अनुसार, सहकारी समिति बरगांव से जुड़े एक प्रकरण की जांच अनुविभागीय अधिकारी (राजस्व) शहपुरा के निर्देशन में गठित जांच दल द्वारा की गई थी। जांच दल में तहसीलदार, नायब तहसीलदार, खाद्य अधिकारी तथा राजस्व निरीक्षक शामिल थे। जांच के दौरान संबंधित भूमि पर सिकमी बटाईदार का नाम दर्ज नहीं पाया गया तथा समर्थन मूल्य पर फसल विक्रय संबंधी दावे भी असत्य पाए गए।
जांच प्रतिवेदन में तत्कालीन नायब तहसीलदार शैलेष गौर को दोषमुक्त बताया गया था। इसके बावजूद वरिष्ठ सहकारी निरीक्षक रामकृष्ण उद्दे द्वारा जांच रिपोर्ट के विपरीत पुलिस थाना में बयान दर्ज कराए गए, जिसके आधार पर शैलेष गौर के विरुद्ध एफआईआर दर्ज की गई।
प्रशासनिक जांच में यह भी सामने आया कि बयान दर्ज कराने से पूर्व रामकृष्ण उद्दे ने न तो जिला कलेक्टर और न ही अपने विभागीय वरिष्ठ अधिकारियों से अनुमति प्राप्त की थी। इस कृत्य को पदीय दायित्वों के निर्वहन में घोर लापरवाही एवं अनुशासनहीनता माना गया है।
आदेश में उल्लेख किया गया है कि उनका आचरण मध्यप्रदेश सिविल सेवा (आचरण) नियम, 1965 के नियम-3 के अंतर्गत कदाचार की श्रेणी में आता है। इसी आधार पर मध्यप्रदेश सिविल सेवा (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियम, 1966 के नियम-9 के तहत उन्हें तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया गया है।
निलंबन अवधि में उनका मुख्यालय जिला पंचायत डिंडौरी निर्धारित किया गया है तथा नियमानुसार जीवन निर्वाह भत्ता देय होगा।
जिला प्रशासन की इस कार्रवाई को शासकीय कार्यों में पारदर्शिता, जवाबदेही और अनुशासन सुनिश्चित करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।