बच्चों और महिलाओं की सुरक्षा को लेकर सीधी में बडा़ जागरूकता अभियान,कानूनों व योजनाओं की दी गई विस्तृत जानकारी

सीधी➖(राकेश शर्मा) जिले में बच्चों एवं महिलाओं की सुरक्षा, पोषण, शिक्षा और अधिकारों को सुनिश्चित करने के उद्देश्य से विभिन्न कानूनों और योजनाओं की जानकारी आमजन तक पहुँचाने के लिए व्यापक जागरूकता अभियान चलाया जा रहा है। इस दौरान बाल संरक्षण, महिला सुरक्षा, बाल विवाह रोकथाम, पोषण कार्यक्रम एवं चाइल्ड हेल्पलाइन सेवाओं से जुड़ी महत्वपूर्ण जानकारियां साझा की गईं।
अभियान के अंतर्गत यौन अपराधों से बालकों का संरक्षण अधिनियम (POCSO) 2012 के प्रावधानों पर विस्तार से प्रकाश डाला गया। बताया गया कि 18 वर्ष से कम आयु के बच्चों के साथ होने वाले किसी भी प्रकार के यौन अपराध को इस अधिनियम के तहत गंभीर अपराध माना गया है और दोषियों के लिए सख्त दंड का प्रावधान है। साथ ही यह भी बताया गया कि किसी भी प्रकार की शंका या घटना की जानकारी तुरंत पुलिस या संबंधित विभाग को देना अनिवार्य है।
इसी क्रम में बाल विवाह प्रतिषेध अधिनियम 2006 के प्रावधानों से अवगत कराया गया। बताया गया कि बाल विवाह कराना या उसमें सहयोग करना दंडनीय अपराध है, जिसमें अधिकतम 2 वर्ष तक का कारावास और 1 लाख रुपये तक के जुर्माने का प्रावधान है। नागरिकों से अपील की गई कि यदि कहीं बाल विवाह की जानकारी मिले तो तत्काल चाइल्डलाइन 1098, महिला एवं बाल विकास विभाग या पुलिस को सूचना दें।कार्यक्रम में चाइल्ड हेल्पलाइन 1098 की उपयोगिता पर विशेष जोर दिया गया। बताया गया कि यह सेवा 24 घंटे उपलब्ध राष्ट्रीय टोल-फ्री हेल्पलाइन है, जिसके माध्यम से संकटग्रस्त बच्चों को तत्काल सहायता, चिकित्सा, कानूनी सहयोग और पुनर्वास सेवाएं उपलब्ध कराई जाती हैं। शिकायत मिलने के बाद त्वरित कार्रवाई कर बच्चों को सुरक्षित वातावरण प्रदान किया जाता है।
इसके अलावा सड़क पर रहने वाले बच्चों (स्ट्रीट चिल्ड्रन) की पहचान और पुनर्वास के लिए बनाई गई राज्य नीति की जानकारी दी गई। बताया गया कि ऐसे बच्चों को चिन्हित कर उन्हें शिक्षा, स्वास्थ्य, पोषण और आश्रय की सुविधाएं उपलब्ध कराई जाती हैं तथा जरूरतमंद परिवारों को आर्थिक सहायता भी दी जाती है।कार्यक्रम में पोषण एवं स्वास्थ्य संबंधी योजनाओं पर भी विस्तार से चर्चा की गई। आंगनवाड़ी केंद्रों के माध्यम से बच्चों, किशोरी बालिकाओं, गर्भवती एवं धात्री माताओं को संतुलित आहार, टीकाकरण और स्वास्थ्य संबंधी परामर्श प्रदान करने पर जोर दिया गया। साथ ही पोषण आहार की गुणवत्ता की नियमित निगरानी के लिए ग्राम स्तर पर समितियों की भूमिका को महत्वपूर्ण बताया गया।
अधिकारियों ने कहा कि इन कानूनों और योजनाओं का उद्देश्य केवल दंड देना नहीं, बल्कि बच्चों और महिलाओं को सुरक्षित वातावरण प्रदान करना और उनके समग्र विकास को सुनिश्चित करना है। उन्होंने आमजन से अपील की कि किसी भी प्रकार की अनियमितता, हिंसा या बाल विवाह जैसी घटनाओं की जानकारी तुरंत संबंधित विभाग को दें, ताकि समय रहते आवश्यक कार्रवाई की जा सके।