एक ही बिल से दो बार भुगतान, वर्क आईडी–जियो टैग गायब: अमरपुर जनपद की कोको पंचायत में 5वें–15वें वित्त की राशि में गड़बड़ी के आरोप

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जिला ब्यूरो मनोज कुमार यादव कि रिपोर्ट

 

डिंडौरी। जनपद पंचायत अमरपुर अंतर्गत ग्राम पंचायतों में इन दिनों 5वें एवं 15वें वित्त आयोग की राशि के कथित दुरुपयोग का मामला सामने आया है। आरोप है कि शासन द्वारा तय नियमों और दिशा-निर्देशों को दरकिनार कर सरपंच और सचिव द्वारा मनमाने तरीके से भुगतान किए जा रहे हैं। मामले को लेकर निगरानी तंत्र की भूमिका पर भी सवाल उठने लगे हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि समय रहते जांच नहीं हुई तो पंचायत स्तर पर विकास के लिए आई राशि का बड़ा हिस्सा अनियमितताओं की भेंट चढ़ सकता है।

 

मामला अमरपुर जनपद पंचायत अंतर्गत ग्राम पंचायत कोको का बताया जा रहा है, जहां पंचायत सरपंच छोटी बाई सैयाम और सचिव शिव प्रसाद यादव पर पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग की गाइडलाइन की अनदेखी कर निर्माण कार्यों से जुड़ी राशि अपने चहेते सप्लायरों के खातों में डालने के आरोप लगे हैं।

 

जानकारी के अनुसार 5वें वित्त की राशि में वर्ष 2025-26 के दौरान पुताई सामग्री खरीदी के नाम पर के.जी.एन. हार्डवेयर के बिल क्रमांक 461 पर एक ही सामग्री के लिए दो बार भुगतान दर्शाया गया है। रिकॉर्ड में एक ही बिल पर 6620 रुपये और 6600 रुपये का भुगतान दिखाया गया है, जबकि सामग्री की खरीदी एक ही बार की गई थी। इसके अलावा आकस्मिक बिलों के नाम पर पुताई कार्य के लिए 8720, 5400, 8870, 8500 और 5840 रुपये का भुगतान भी दर्ज है। इस प्रकार केवल पुताई कार्य के नाम पर लगभग 50 हजार 550 रुपये निकाले जाने की बात सामने आई है।

 

वहीं स्टेशनरी सामग्री के नाम पर वर्ष 2025-26 में 6574 रुपये का भुगतान दर्शाया गया है। एक ओर पंचायत द्वारा कंप्यूटर दुकानों से कंप्यूटर सामग्री खरीदी जा रही है, वहीं दूसरी ओर फोटोकॉपी और स्टेशनरी के नाम पर भी हजारों रुपये के बिल लगाए गए हैं। इसी तरह चाय-नाश्ते के नाम पर 5200, 8770 और 8870 रुपये यानी कुल 22 हजार 840 रुपये खर्च दिखाए गए हैं। ग्रामीणों का कहना है कि महज दो महीनों में चाय-नाश्ते पर इतनी बड़ी राशि खर्च होना संदेह पैदा करता है।

 

मामले में सबसे चौंकाने वाली बात बिल की तारीख से पहले भुगतान का सामने आना बताया जा रहा है। धुर्वे कंप्यूटर एवं स्टेशनरी के माध्यम से 04 जनवरी 2025 को जी राम जी और तिरंगा झंडा तथा फोटो के नाम पर 6000 रुपये का भुगतान किया गया, जबकि संबंधित बिल 16 दिसंबर 2025 को “विकसित भारत” कार्यक्रम के नाम से प्रस्तुत किया गया। ऐसे में सवाल उठ रहा है कि जब बिल बाद की तारीख का है तो भुगतान पहले कैसे कर दिया गया।

 

इसी तरह 26 जनवरी 2026 के अवसर पर 04 फरवरी 2026 को तिरंगा झंडा और फोटो के नाम पर 3850 रुपये का भुगतान भी दिखाया गया है। करीब दस महीनों के भीतर दो बार तिरंगा झंडा और फोटो के नाम पर हजारों रुपये खर्च दिखाए जाने से भी संदेह गहरा गया है।

 

अनियमितताओं के आरोप केवल 5वें वित्त तक सीमित नहीं हैं। बताया जा रहा है कि 15वें वित्त आयोग की राशि में भी गड़बड़ी सामने आई है। वित्तीय वर्ष 2023-24 में 15वें वित्त टाइड और अनटाइड मद से 3 लाख 39 हजार 190 रुपये, 14 हजार 500 रुपये, 12 हजार 440 रुपये, 15 हजार रुपये, 2920 रुपये, 12 हजार रुपये और 14 हजार 376 रुपये का भुगतान दर्ज है, जबकि कई भुगतानों में वर्क आईडी और जियो-टैग फोटो उपलब्ध नहीं हैं।

 

स्थानीय सूत्रों के अनुसार नेट रिचार्ज, सीसी सड़क और अन्य मदों में भी नियम विरुद्ध भुगतान किए जाने की आशंका जताई जा रही है। ग्रामीणों का कहना है कि यदि पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराई जाए तो पंचायत स्तर पर और भी कई अनियमितताएं सामने आ सकती हैं।

 

अब देखना यह होगा कि जिला प्रशासन और पंचायत विभाग इन गंभीर आरोपों पर कब संज्ञान लेते हैं और दोषियों के खिलाफ क्या कार्रवाई होती है, या फिर यह मामला भी अन्य मामलों की तरह फाइलों में दबकर रह जाएगा।

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