बांकी की सड़क बदहाल, काग़ज़ों में कमाल — छह लाख की मरम्मत ने खड़ा किया बवाल

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सिहावल जनपद क्षेत्र की ग्राम पंचायत बाक़ी में विकास के नाम पर उठती आहट अब सवालों की गूंज में बदलती दिखाई दे रही है। कागज़ों पर लिखी तरक्की की इबारतें ज़मीन पर उतरते-उतरते जैसे कहीं गुम हो गई हों। पीसीसी सड़क की मरम्मत के लिए पांचवें और पन्द्रहवें वित्त आयोग से छह लाख रुपये से अधिक की राशि स्वीकृत बताई जाती है, मगर हक़ीक़त यह है कि सड़क आज भी टूटी-फूटी और बदहाल खड़ी है। गांव की गलियों में धूल उड़ती है और लोगों के दिलों में यह सवाल बार-बार सिर उठाता है कि आखिर यह रकम किस राह से गुज़रकर कहाँ जा ठहरी।
ग्रामवासियों का कहना है कि मरम्मत के नाम पर सरकारी ख़ज़ाने से रकम तो निकल गई, लेकिन काम की सूरत कहीं दिखाई नहीं देती। जगह-जगह सड़क उखड़ी हुई है, कहीं गड्ढे हैं तो कहीं गिट्टी का नामोनिशान तक नहीं। लोगों का आरोप है कि अगर इस काम की तकनीकी जांच कराई जाए और भुगतान से जुड़े काग़ज़ात की तह तक जाया जाए, तो सच्चाई की परतें खुल सकती हैं। गांव में यह भी चर्चा है कि सरपंच और सचिव की मिलीभगत से विकास की रकम ने अपना रास्ता बदल लिया और जनता को फिर उसी टूटी राह पर छोड़ दिया गया।
इस पूरे मामले ने जनपद स्तर की निगरानी व्यवस्था पर भी सवालों की तल्ख़ लकीर खींच दी है। बिना ठोस सत्यापन के लाखों रुपये का भुगतान कैसे हो गया, किसने काम को पूरा बताया और किस आधार पर मुहर लगा दी — यह अब प्रशासन के लिए जवाब देने का विषय बन गया है। ग्रामीणों ने मांग की है कि पूरे प्रकरण की निष्पक्ष जांच कराई जाए और जो भी दोषी हो उस पर सख़्त कार्रवाई की जाए, ताकि विकास के नाम पर होने वाली इस बेपरवाही और कथित भ्रष्टाचार पर लगाम लग सके।
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