“सीधी जिले में करोड़ों का कॉलेज निर्माण सवालों में: निरीक्षण में गुणवत्ता, सुरक्षा और पारदर्शिता पर गंभीर आरोप” सूचना बोर्ड गायब, मजदूर बिना सुरक्षा उपकरण, टेस्ट रिपोर्ट नहीं — निरीक्षण के बाद उठे बड़े सवाल, जांच की मांग तेज

“जिला ब्यूरो चीफ सीधी से विनय कुमार त्रिपाठी की रिपोर्ट”
सीधी। जिले के शासकीय संजय गांधी महाविद्यालय में लगभग 2.60 करोड़ रुपये की लागत से बन रहे नए भवन निर्माण को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। हाल ही में हुए निरीक्षण के दौरान सामने आई खामियों ने निर्माण की गुणवत्ता, सुरक्षा व्यवस्था और वित्तीय पारदर्शिता — तीनों को लेकर चिंता बढ़ा दी है।
निरीक्षण के दौरान छात्र संगठन के प्रतिनिधियों ने महाविद्यालय प्रशासन के साथ निर्माण स्थल का जायजा लिया। निरीक्षण के बाद संगठन की ओर से आरोप लगाया गया कि निर्माण कार्य में कई बुनियादी नियमों का पालन नहीं किया जा रहा है, जिससे भविष्य में जोखिम की आशंका बढ़ सकती है।
निरीक्षण में सामने आई प्रमुख कमियां
• निर्माण स्थल पर अनिवार्य सूचना बोर्ड नहीं पाया गया, जिससे कार्य की पारदर्शिता पर सवाल उठे।
• साइट स्तर पर निर्माण एजेंसी की स्पष्ट जानकारी उपलब्ध नहीं मिली, केवल ठेकेदार का नाम बताया गया।
• महाविद्यालय प्रशासन के अनुसार निर्माण कार्य Madhya Pradesh Building Development Corporation (MPBDC) के माध्यम से कराया जा रहा है।
• निर्माण सामग्री जैसे RCC स्लैब, ब्लॉक और M-25 सीमेंट ब्रिक की गुणवत्ता संबंधी टेस्ट रिपोर्ट और प्रमाणपत्र मौके पर उपलब्ध नहीं मिले।
• मजदूरों के पास हेलमेट, सेफ्टी शूज और हार्नेस बेल्ट जैसे आवश्यक सुरक्षा उपकरण नहीं पाए गए।
• साइट पर प्राथमिक उपचार (फर्स्ट एड) और स्वास्थ्य संबंधी बुनियादी व्यवस्था का अभाव देखा गया।
• कई स्थानों पर खुले बिजली तार पाए गए, जिससे संभावित हादसे की आशंका जताई गई।
भुगतान प्रक्रिया पर भी उठे सवाल,
निरीक्षण के दौरान यह मुद्दा भी सामने आया कि मजदूरों को नकद भुगतान किए जाने की बात कही गई। जबकि ऑनलाइन भुगतान और पीएफ कटौती के दावे किए गए, लेकिन संबंधित लेबर रजिस्टर मौके पर प्रस्तुत नहीं किया गया। इससे भुगतान व्यवस्था की पारदर्शिता को लेकर संदेह व्यक्त किया गया।
संगठन की प्रतिक्रिया — सुरक्षा और गुणवत्ता पर चिंता
निरीक्षण के बाद संगठन के प्रतिनिधियों ने कहा कि बिना पर्याप्त गुणवत्ता प्रमाणपत्र और सुरक्षा इंतजाम के निर्माण कार्य किया जाना चिंताजनक है। उनका कहना है कि यदि समय रहते सुधार नहीं किए गए तो इससे छात्रों और मजदूरों दोनों की सुरक्षा प्रभावित हो सकती है।
महाविद्यालय प्रशासन का पक्ष,
महाविद्यालय के प्राचार्य ने निरीक्षण में सामने आई कमियों को गंभीर बताते हुए कहा कि संबंधित विभाग को इसकी सूचना दी जाएगी। उन्होंने आश्वासन दिया कि यदि जांच में किसी प्रकार की अनियमितता या गुणवत्ता संबंधी कमी सामने आती है तो नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।
जांच की मांग और आगे की स्थिति,
निरीक्षण के बाद निर्माण कार्य की थर्ड पार्टी क्वालिटी जांच और उच्च स्तरीय जांच की मांग सामने आई है। साथ ही यह भी कहा गया कि निर्माण में आवश्यक सुधार सुनिश्चित किए जाएं ताकि छात्रों के लिए सुरक्षित और गुणवत्तापूर्ण भवन तैयार हो सके।
करोड़ों रुपये की लागत से बन रहा यह शैक्षणिक भवन शुरुआती चरण में ही सवालों के घेरे में आ गया है। गुणवत्ता दस्तावेजों की अनुपलब्धता, सुरक्षा व्यवस्था में कमी और भुगतान प्रक्रिया पर उठे सवाल — यह संकेत देते हैं कि निर्माण कार्य की निगरानी और पारदर्शिता मजबूत करने की आवश्यकता है। अब आगे की जांच और सुधारात्मक कार्रवाई ही तय करेगी कि यह परियोजना तय मानकों पर कितनी खरी उतरती है।