कुएं में गिरकर 17 वर्षीय किशोरी की दर्दनाक मौत, गांव में पसरा मातम, हर आंख नम

सीधी जिले के कुसमी थाना क्षेत्र अंतर्गत ग्राम रौहाल में शनिवार 7 फरवरी 2026 की शाम एक हृदयविदारक घटना सामने आई, जहां कुएं में गिरने से 17 वर्षीय किशोरी की दर्दनाक मौत हो गई। इस हादसे के बाद पूरे गांव में शोक की लहर दौड़ गई है, वहीं परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल बना हुआ है।
मृतिका की पहचान
प्राप्त जानकारी के अनुसार मृतिका का नाम नीलम अगरिया (17 वर्ष) है, जो मोहन अगरिया की पुत्री थी। नीलम बीते कुछ समय से अपने मामा शिवभान अगरिया (लगभग 50 वर्ष), निवासी ग्राम रौहाल के यहां रह रही थी।
कैसे हुआ हादसा
घटना 7 फरवरी 2026 को शाम लगभग 4:00 बजे की बताई जा रही है। मामा शिवभान अगरिया ने कुसमी थाने में दर्ज कराई गई रिपोर्ट में बताया कि घटना के समय वे जंगल लकड़ी लेने गए हुए थे। इसी दौरान नीलम किसी कार्य से घर से बाहर निकली और असुरक्षित खुले कुएं के पास पहुंच गई, जहां संतुलन बिगड़ने से वह कुएं में गिर गई।
कुछ समय बाद पड़ोसियों ने कुएं से आवाज और हलचल देखी, जिसके बाद घटना की जानकारी शिवभान अगरिया को दी गई। सूचना मिलते ही परिजन मौके पर पहुंचे और तत्काल पुलिस को अवगत कराया गया।
पुलिस व प्रशासन की कार्रवाई
घटना की सूचना मिलते ही कुसमी थाना प्रभारी अरुणा द्विवेदी देर शाम पुलिस टीम के साथ घटनास्थल पर पहुंचीं। पुलिस ने ग्रामीणों की मदद से लाल कुएं से किशोरी का शव बाहर निकलवाया। मौके पर विधिवत पंचनामा कार्रवाई कर शव को पोस्टमार्टम के लिए भेजा गया।
शव को सीएचसी कुसमी ले जाकर पोस्टमार्टम कराया गया। पोस्टमार्टम की प्रक्रिया पूर्ण होने के बाद शव परिजनों को सौंप दिया गया।
पुलिस का बयान
इस संबंध में थाना प्रभारी अरुणा द्विवेदी ने बताया कि
> “प्रथम दृष्टया मामला कुएं में गिरने से मृत्यु का प्रतीत हो रहा है। फिलहाल पुलिस ने मर्ग कायम कर लिया है और घटना के सभी पहलुओं की गहन जांच की जा रही है।”
गांव में शोक का माहौल
घटना के बाद पूरे ग्राम रौहाल में मातम पसरा हुआ है। किशोरी की असमय मौत से ग्रामीण स्तब्ध हैं। अंतिम दर्शन के दौरान बड़ी संख्या में ग्रामीण मौजूद रहे और हर आंख नम दिखाई दी।
खुले कुओं की सुरक्षा पर उठे सवाल,
इस दुखद घटना ने एक बार फिर ग्रामीण इलाकों में खुले और असुरक्षित कुओं की समस्या को उजागर कर दिया है। ग्रामीणों ने प्रशासन से मांग की है कि ऐसे कुओं के चारों ओर घेराबंदी, ढक्कन और चेतावनी संकेत लगाए जाएं, ताकि भविष्य में इस तरह की दर्दनाक घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो।