प्रबंधकीय विकास कार्यक्रम का तीसरा दिन

मुबारक अली संवाददाता
शाहजहांपुर, स्वामी शुकदेवानंद महाविद्यालय के वाणिज्य विभाग में चल रहें प्रबंधकीय विकास कार्यक्रम के तीसरे दिन “भावनात्मक बुद्धिमत्ता और नेतृत्व” विषय पर सन इंस्टिट्यूट ऑफ़ मैनेजमेंट एंड टेक्नोलॉजी के निदेशक डॉ. विकास अग्रवाल ने बोलते हुए कहा कि एक सफल नेता बनने के लिए केवल बौद्धिक क्षमता ही पर्याप्त नहीं होती, बल्कि भावनाओं को समझना, नियंत्रित करना और दूसरों की भावनाओं के प्रति संवेदनशील होना भी आवश्यक होता है। नेता वह होता है जो अपने अधीनस्थों को आगे बढ़ाने में सहयोग दे। नेतृत्व क्षमता विकास हेतु आत्म-जागरूकता विकसित करने पर बल देते हुए कहा कि व्यक्ति को पहले यह समझना चाहिए कि वह किसी परिस्थिति में कैसा महसूस कर रहा है और उसका व्यवहार दूसरों को किस प्रकार प्रभावित कर सकता है। आत्म-नियंत्रण को नेतृत्व की मूलभूत आवश्यकता बताते हुए उन्होंने कहा कि कठिन परिस्थितियों में शांत रहकर संतुलित निर्णय लेना ही सच्चे नेतृत्व की पहचान है। डॉ अग्रवाल ने व्याख्यान के दौरान सहानुभूति के महत्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि एक प्रभावी नेता वही होता है जो अपने साथ काम करने वाले लोगों की समस्याओं और दृष्टिकोण को समझ सके। इससे टीम भावना मजबूत होती है और कार्यस्थल का वातावरण सकारात्मक बनता है। इसके लिए नेता की मनोदशा नकारात्मक न होकर सकारात्मक होनी चाहिए ।
उन्होंने तनाव प्रबंधन की उपयोगी तकनीकों के बारे में भी जानकारी दी। उन्होंने बताया कि जीवन और करियर में दबाव की स्थितियाँ सामान्य हैं, लेकिन भावनात्मक रूप से संतुलित व्यक्ति ही उन परिस्थितियों का सही ढंग से सामना कर सकता है। डॉ अग्रवाल ने अपने व्याख्यान में भावनात्मक प्रतिक्रियाओं को पहचानने, तनाव के समय धैर्य बनाए रखने तथा कठिन परिस्थितियों में शांत रहकर विचारपूर्ण निर्णय लेने की प्रेरणा दी गई। इससे पूर्व डॉ. शिवानी भारद्वाज ने चंदन तिलक लगाकर तथा डॉ गौरव सक्सेना ने पटका पहना कर मुख्य वक्ता का स्वागत किया। कार्यक्रम में डॉ अर्चना गर्ग, डॉ विनीता राठौर, डॉ कविता भटनागर, डॉ सचिन खन्ना, सुयश सिन्हा, डॉ कमलेश गौतम आदि शिक्षक उपस्थित रहे।