राष्ट्रपति पदक से सम्मानित हुए अनिल सांबारे: साहस की अनूठी मिसाल

संवाददाता- निलेश कलसकर जिला ब्युरो चिफ पांढुरना
पांढुरना। स्थानीय सी.एम. राइज शाला के सेवानिवृत्त गणित व्याख्याता श्री अनिल सांबारे को उनके अदम्य साहस के लिए भारत के राष्ट्रपति द्वारा प्रतिष्ठित “जीवन रक्षा पदक” से सम्मानित किया गया है।
श्री सांबारे ने वर्ष 1989 और 1990 के दौरान अपनी जान की परवाह न करते हुए डूब रहे पांच लोगों की जान बचाई थी। उनकी इसी वीरता और मानवीय सेवा को देखते हुए उन्हें 26 जनवरी 1993 को गणतंत्र दिवस के मौके पर इस राष्ट्रीय पदक से नवाजा गया।
नदी किनारे रहने के कारण उन्होंने बचपन से ही कई लोगों को जीवनदान दिया है। सेवा के इस कठिन रास्ते में उन्हें गंभीर चोटें भी आईं और वे शारीरिक रूप से चोटिल भी हुए लेकिन उन्होंने कभी हार नहीं मानी। वे न केवल एक आदर्श शिक्षक रहे हैं बल्कि समाज और प्रशासन के बीच एक मददगार कड़ी के रूप में भी हमेशा खड़े रहे। चोरों को पकड़वाने से लेकर कानून व्यवस्था बनाए रखने तक में उन्होंने सक्रिय भूमिका निभाई है।
सम्मान मिलने पर श्री सांबारे ने कहा कि उन्हें अपने देश पर गर्व है और सेवानिवृत्ति के बाद भी वे समाज सेवा का कार्य जारी रखेंगे। उनका कहना है कि जब तक उनकी सांसें चल रही हैं वे जनसेवा के मार्ग पर अडिग रहेंगे। उनका यह समर्पण आज के युवाओं के लिए एक बड़ी प्रेरणा है।