व्यवसायिक शिक्षा ट्रेड – कृषि के विद्यार्थियों को जैविक खेती का प्रशिक्षण दिया गया।

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गौवंश आधारित जैविक खेती से भूमि,पर्यावरण और स्वास्थ्य में होगा सुधार – बिहारी लाल साहू

 

डिण्डौरी/शहपुरा

शासकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय कोहानी देवरी विकास खण्ड शहपुरा में व्यावसायिक शिक्षा (ट्रेड – कृषि) के अंतर्गत अध्ययनरत छात्र-छात्राओं को गौवंश आधारित जैविक एवं प्राकृतिक खेती का प्रशिक्षण दिया गया। इस प्रशिक्षण का उद्देश्य विद्यार्थियों को पारंपरिक कृषि के साथ-साथ आधुनिक, टिकाऊ और पर्यावरण-सम्मत खेती के तरीकों से अवगत कराना रहा।

रासायनिक, जैविक, प्राकृतिक खेती के अंतर पर प्रकाश डाला, साथ ही अभी तक जैविक कृषि विशेषज्ञ द्वारा 20 हजार से अधिक विद्यार्थियों को जैविक/प्राकृतिक खेती पर प्रशिक्षण दिया जा चुका है।

 

कार्यक्रम में नर्मदांचल गौ सेवा समिति के अध्यक्ष एवं जैविक कृषि विशेषज्ञ बिहारी लाल साहू द्वारा विद्यार्थियों को जैविक खेती के विभिन्न पहलुओं पर व्यावहारिक जानकारी दी गई। उन्होंने केंचुआ खाद, बीजोपचार में बीज की शोध प्रक्रिया उक्ठा जैसे रोग से बचाने के लिए बताया। जीवामृत, अग्नि अस्त्र पर विभिन्न प्रकार के कीटों को नियंत्रण करना जैसे जैविक संसाधनों के उपयोग और निर्माण की विधि समझाया। साथ ही मृदा परीक्षण पर भी विस्तृत जानकारी दिया।

बिहारी लाल साहू ने कहा कि “गौवंश आधारित प्राकृतिक खेती न केवल मृदा की उर्वरता बढ़ाती है, बल्कि पर्यावरण और मानव स्वास्थ्य के लिए भी लाभकारी है। आदिवासी बहुल्य जिला डिण्डौरी जैसे क्षेत्रों में यह खेती स्वरोजगार और आत्मनिर्भरता का सशक्त माध्यम बन सकती है।”

विद्यालय के प्राचार्य महेश वरकड़े व्यावसायिक प्रशिक्षक कृषि शिक्षक प्रदीप नागपुरे समस्त स्टाफ की उपस्थिति में यह प्रशिक्षण आयोजित किया गया। इस कार्यक्रम में कृषि ट्रेड के 35 छात्र-छात्राएं उपस्थित रहे, जिन्होंने प्रशिक्षण में रुचि लेकर भविष्य में जैविक खेती को अपनाने की इच्छा व्यक्त की।

यह पहल विद्यार्थियों को न केवल कृषि कार्यों में दक्ष बनाएगी, बल्कि उन्हें आत्मनिर्भर और रोजगारोन्मुखी भी बनाएगी।

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