ऐतिहासिक जन-आक्रोश: पांढुरना में ओबीसी मोर्चा ने भरी हुंकार, कटक अधिवेशन रोकने वालों के खिलाफ राष्ट्रपति के नाम सौंपा ज्ञापन

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संवाददाता- निलेश कलसकर जिला ब्युरो चिफ पांढुरना

 

पांढुरना/ओडिशा के कटक में बामसेफ और भारत मुक्ति मोर्चा के राष्ट्रीय अधिवेशन को प्रशासनिक तंत्र द्वारा रोके जाने के विरोध में आज पांढुरना की सड़कों पर भारी जन-सैलाब उमड़ पड़ा। राष्ट्रीय पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) मोर्चा के नेतृत्व में समाज के विभिन्न संगठनों ने एकजुट होकर इस कार्रवाई को लोकतंत्र की हत्या और ओबीसी समाज के संवैधानिक अधिकारों पर हमला करार दिया।

साजिश के खिलाफ पांढुरना में एकजुटता

प्रदर्शनकारियों ने जिलाधिकारी कार्यालय पहुंचकर कड़ा विरोध दर्ज कराया। ज्ञापन में स्पष्ट रूप से उल्लेख किया गया है कि जाति आधारित जनगणना के मुद्दे को दबाने के लिए आरएसएस और बीजेपी के दबाव में आकर ओडिशा प्रशासन ने ऐन वक्त पर अधिवेशन रद्द किया। वक्ताओं ने कहा कि संविधान के अनुच्छेद 14, 19 और 21 का उल्लंघन कर मूलनिवासी समाज की आवाज को कुचलने का प्रयास किया जा रहा है, जिसे पांढुरना की जनता कतई बर्दाश्त नहीं करेगी।

प्रमुख कार्यकर्ताओं की रही दमदार मौजूदगी

ज्ञापन सौंपने के दौरान पांढुरना के प्रमुख सामाजिक कार्यकर्ताओं और पदाधिकारियों ने अपनी उपस्थिति दर्ज कराई। इस अवसर पर मुख्य रूप से सिद्धार्थ बागडे, प्रदीप सोमकुवर, अरुण कुमार बागडे, गोविंद राव दुपारे, पुरुषोत्तम ढोके, प्रवीण धुर्वे, विशाल, नरेंद्र बागडे, इंद्रजित बागडे, सुखदेव वरठी, योगेश देशभ्रतार और विजय घाटोड सहित बड़ी संख्या में अन्य साथी उपस्थित रहे। उपस्थित सभी साथियों ने संकल्प लिया कि जब तक सरकार इस पर माफी नहीं मांगती और अनुमति बहाल नहीं करती, आंदोलन जारी रहेगा।

आगे का कड़ा रुख

पांढुरना में ज्ञापन सौंपने के साथ ही यह घोषणा की गई कि यदि 22 फरवरी तक मांगें पूरी नहीं हुईं, तो यहाँ से हजारों की संख्या में कार्यकर्ता नागपुर स्थित आरएसएस मुख्यालय की महा-रैली में शामिल होने के लिए कूच करेंगे।

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