शासकीय कला एवं वाणिज्य महाविद्यालय मझौली में “रन फॉर स्वदेशी” एवं स्वदेशी संकल्प पर्व का आयोजन,स्वामी विवेकानंद के विचार युवाओं का मार्ग प्रशस्त करते हैं – सुश्री रुचि परते

मझौली।,सीधी, मध्यप्रदेश शासन उच्च शिक्षा विभाग भोपाल एवं शिक्षा मंत्रालय भारत सरकार के निर्देशन तथा महाविद्यालय की प्राचार्य डॉ. गीता भारती के मार्गदर्शन में शासकीय कला एवं वाणिज्य महाविद्यालय मझौली में “रन फॉर स्वदेशी” एवं स्वदेशी संकल्प पर्व के अंतर्गत मैराथन दौड़ का आयोजन किया गया। कार्यक्रम का उद्देश्य आत्मनिर्भर भारत एवं पूर्ण रोजगारयुक्त भारत के निर्माण हेतु युवाओं को स्वदेशी मूल्यों, कौशल विकास, शारीरिक एवं मानसिक स्वास्थ्य, अनुशासन और राष्ट्र निर्माण के प्रति जागरूक करना रहा।
स्वामी विवेकानंद के विचारों से प्रेरित हों युवा – रुचि परते
स्वदेशी संकल्प सभा में मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित सुश्री रुचि परते, व्यवहार न्यायाधीश वर्ग–2, व्यवहार न्यायालय मझौली ने विद्यार्थियों को संबोधित करते हुए कहा कि स्वामी विवेकानंद जी के विचार आज भी युवाओं का मार्गदर्शन करते हैं। उन्होंने युवाओं से आह्वान किया कि वे इन विचारों को अपने जीवन में आत्मसात कर विकसित भारत के निर्माण में सक्रिय भूमिका निभाएं।
उन्होंने प्रेरक शब्दों में कहा कि “जीवन सोने में बिताना है या सोना प्राप्त करना है, यह निर्णय प्रत्येक व्यक्ति को स्वयं करना होता है।”
स्वदेशी संकल्प से आत्मनिर्भर भारत का निर्माण – डॉ. गीता भारती
कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए महाविद्यालय की प्राचार्य डॉ. गीता भारती ने कहा कि स्वामी विवेकानंद जी के विचार देशभर के युवाओं के लिए प्रेरणा का मूल मंत्र हैं। उन्होंने कहा कि स्वदेशी का संकल्प लेकर ही युवा वर्ग आत्मनिर्भर भारत के निर्माण में अपना सार्थक योगदान दे सकता है।
मैराथन में युवाओं ने दिखाया उत्साह
“रन फॉर स्वदेशी” संकल्प मैराथन में विद्यार्थियों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया।
पुरुष वर्ग में
ओमप्रकाश कुशवाहा – प्रथम
भीमसेन कुशवाहा – द्वितीय
सविनय सिंह सोमवंशी – तृतीय स्थान
महिला वर्ग में
चंदा गुप्ता – प्रथम
रूबी यादव – द्वितीय
यशोदा सिंह – तृतीय स्थान पर रहीं।
कार्यक्रम में रही व्यापक सहभागिता
कार्यक्रम में महाविद्यालय के समस्त स्टाफ एवं विद्यार्थियों ने सक्रिय सहभागिता की। कार्यक्रम का संचालन डॉ. संदीप कुमार शर्मा, समन्वयक स्वामी विवेकानंद कैरियर मार्गदर्शन प्रकोष्ठ द्वारा किया गया तथा संयोजन डॉ. असलेंद्र कुमार जायसवाल ने किया।
अंत में प्रो. बी.एल. सिंह आयाम ने सभी अतिथियों, प्रतिभागियों एवं आयोजकों के प्रति आभार व्यक्त किया।
कार्यक्रम का समापन स्वदेशी अपनाने, आत्मनिर्भर बनने और राष्ट्र निर्माण में योगदान देने के संकल्प के साथ हुआ।