शासकीय कन्या महाविद्यालय सीधी में राष्ट्रीय युवा दिवस कार्यक्रम का आयोजन, स्वामी विवेकानंद के विचारों से युवतियों को मिली नई दिशा

शासकीय कन्या महाविद्यालय सीधी में 12 जनवरी 2026 को स्वामी विवेकानंद जी की जयंती के अवसर पर राष्ट्रीय युवा दिवस का आयोजन गरिमामय वातावरण में किया गया। कार्यक्रम का आयोजन राष्ट्रीय सेवा योजना (एनएसएस) एवं युवा रेडक्रॉस समिति के संयुक्त तत्वाधान में संपन्न हुआ, जिसमें महाविद्यालय की छात्राओं ने उत्साहपूर्वक सहभागिता की।
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए महाविद्यालय के प्राचार्य प्रो. ओ.पी. नामदेव ने कहा कि स्वामी विवेकानंद जी ने भारतीय दर्शन, वेदांत और योग को पश्चिमी देशों में प्रस्तुत कर भारत को विश्व पटल पर गौरवान्वित किया। उनका जीवन, चिंतन और राष्ट्रभक्ति आज भी युवाओं के लिए प्रेरणा का स्रोत है। उन्होंने कहा कि युवाओं को स्वामी विवेकानंद के विचारों को अपने जीवन में आत्मसात करना चाहिए।
डॉ. सत्येंद्र उपाध्याय ने अपने उद्बोधन में कहा कि “हम वही हैं जो हमारी सोच ने हमें बनाया है।” राष्ट्रीय युवा दिवस हमें यह आत्ममंथन करने का अवसर देता है कि आज का युवा चरित्रवान, साहसी और जिम्मेदार नागरिक बन रहा है या नहीं। उन्होंने छात्राओं से सकारात्मक सोच और आत्मविकास पर जोर दिया।
डॉ. राजेश साहू ने स्वामी विवेकानंद के 1893 में दिए गए ऐतिहासिक भाषण का उल्लेख करते हुए कहा कि “अमेरिका के भाइयों और बहनों” संबोधन ने पूरी दुनिया के सामने भारत की आध्यात्मिक शक्ति और सर्वधर्म समभाव का संदेश रखा। यह संबोधन आज भी युवाओं को आत्मविश्वास, सहिष्णुता और राष्ट्र निर्माण के लिए प्रेरित करता है।
डॉ. नागेंद्र सिंह ने कहा कि स्वामी विवेकानंद का स्वदेशी विचार केवल विदेशी वस्तुओं के बहिष्कार तक सीमित नहीं था, बल्कि यह आत्मनिर्भरता, राष्ट्रीय गौरव और मानवता की सेवा की भावना पर आधारित था। उन्होंने युवाओं से आत्मनिर्भर बनने और समाज सेवा में योगदान देने का आह्वान किया।
कार्यक्रम में महाविद्यालय की छात्रा प्रीति सिंह पवार ने भी स्वामी विवेकानंद के विचारों पर अपने भाव व्यक्त किए।
कार्यक्रम का आभार प्रदर्शन डॉ. प्रतिमा कौल द्वारा किया गया, जबकि संचालन डॉ. प्राची सिंह ने किया।
इस अवसर पर डॉ. नंदकिशोर कलोसिया, प्रो. मानसी भुर्तिया, डॉ. प्रीति सत्यनामी सहित महाविद्यालय का समस्त स्टाफ एवं बड़ी संख्या में छात्राएं उपस्थित रहीं।
कार्यक्रम का समापन स्वामी विवेकानंद के विचारों को जीवन में अपनाने और राष्ट्र निर्माण में सक्रिय भूमिका निभाने के संकल्प के साथ हुआ।