प्राकृतिक खेती से समृद्धि की राह: मोरेश्वर डांडवे बने जिले के किसानों के लिए मिसाल

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पांढुरना संवाददाता- निलेश कलस्कर जिला ब्युरो चिफ

 

पांढुरना। खेती को लाभ का धंधा बनाने की दिशा में क्षेत्र के प्रगतिशील कृषक मोरेश्वर डांडवे ने एक नई इबारत लिखी है। वर्तमान में पूर्णतः प्राकृतिक खेती को अपनाकर उन्होंने न केवल अपनी लागत को कम किया है, बल्कि आय के कई नए स्रोत भी विकसित किए हैं।

मोरेश्वर डांडवे ने अपने खेत में संतरे के बगीचे के साथ-साथ नवाचार करते हुए ककोरा के 400 पौधे लगाए हैं। इसके अतिरिक्त, वे लाकाडोना हल्दी, काली हल्दी और काले आलू जैसी औषधीय व उच्च मूल्य वाली फसलों की खेती कर रहे हैं, जिससे उन्हें बाजार में बेहतर दाम प्राप्त हो रहे हैं।

वर्मी कम्पोस्ट से आत्मनिर्भरता

खेती के साथ-साथ श्री डांडवे जैविक खाद निर्माण में भी सक्रिय हैं। वे स्वयं वर्मी कम्पोस्ट (केंचुआ खाद) और नीम पाउडर तैयार कर रहे हैं। वर्तमान में वे इसका विक्रय कर रहे हैं और आगामी वर्ष में उन्होंने वर्मी कम्पोस्ट पिट की संख्या बढ़ाने का लक्ष्य रखा है। अब वे अपने उत्पादों की विधिवत पैकिंग कर अन्य किसानों को भी उपलब्ध करा रहे हैं।

नवाचार से बढ़ी आय

मोरेश्वर डांडवे की यह सफलता कहानी जिले के अन्य किसानों को प्रेरित कर रही है। उनका अनुभव सिद्ध करता है कि यदि किसान रासायनिक खेती छोड़कर प्राकृतिक पद्धति, विविधता और नवाचार को अपनाए, तो वह आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर और समृद्ध बन सकता है।

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