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आचार्य विद्यासागर गौ संवर्धन योजना से संवर रहा पशुपालकों का भविष्य

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डेयरी व्यवसाय को मिल रहा आर्थिक संबल, ग्रामीण परिवार बन रहे आत्मनिर्भर
सीधी | 02 जनवरी 2026
जिले में दुग्ध उत्पादन को प्रोत्साहन देने और ग्रामीण परिवारों को स्थायी आजीविका से जोड़ने के उद्देश्य से पशुपालन विभाग द्वारा आचार्य विद्यासागर गौ संवर्धन योजना का प्रभावी क्रियान्वयन किया जा रहा है। यह योजना पशुपालकों को संगठित रूप से डेयरी व्यवसाय अपनाने का अवसर प्रदान कर रही है, जिससे वे स्वरोजगार के माध्यम से आर्थिक रूप से सशक्त बन सकें।
योजना के अंतर्गत डेयरी इकाई स्थापित करने के लिए कुल परियोजना लागत का 75 प्रतिशत बैंक ऋण के रूप में उपलब्ध कराया जाता है, जबकि शेष 25 प्रतिशत राशि हितग्राही द्वारा अंशदान के रूप में जमा की जाती है। पशुपालकों को राहत देते हुए शासन द्वारा 7 वर्षों तक 5 प्रतिशत ब्याज प्रतिपूर्ति अनुदान भी प्रदान किया जा रहा है, जिससे ऋण चुकाने का आर्थिक बोझ काफी कम हो जाता है।
योजना का लाभ लेने के लिए पशुपालक के पास न्यूनतम 5 दुधारू पशु एवं 1 एकड़ कृषि भूमि होना आवश्यक है। पशुओं की संख्या बढ़ने पर भूमि की आवश्यकता भी उसी अनुपात में निर्धारित की जाती है, जिससे डेयरी इकाई का संचालन व्यवस्थित और टिकाऊ बना रहता है।
निर्धारित इकाई लागत
5 भैंसों की डेयरी इकाई : ₹4 लाख 25 हजार
5 शंकर नस्ल की गायें : ₹3 लाख 82 हजार
5 देशी गायें : ₹2 लाख 43 हजार 750 रुपये
वहीं 10 दुधारू पशुओं की इकाई के लिए लागत इस प्रकार निर्धारित है—
भैंसों पर ₹8 लाख 40 हजार
शंकर गायों पर ₹7 लाख 51 हजार
देशी गायों पर ₹4 लाख 75 हजार
सामाजिक वर्गों को विशेष सहायता
योजना में सामाजिक वर्गों को ध्यान में रखते हुए विशेष प्रावधान किए गए हैं।
सामान्य वर्ग के पशुपालकों को परियोजना लागत का 25 प्रतिशत तक (अधिकतम ₹1 लाख 25 हजार)
अनुसूचित जाति एवं जनजाति वर्ग के हितग्राहियों को 33 प्रतिशत तक (अधिकतम ₹2 लाख)
मार्जिन मनी सहायता प्रदान की जाती है।
पशुपालन विभाग द्वारा सभी प्रकरण तैयार कर संबंधित बैंकों को भेजे जाते हैं। बैंक से स्वीकृति मिलने के बाद पूरी इकाई लागत की राशि हितग्राही को उपलब्ध करा दी जाती है। इसके अतिरिक्त बैंक ऋण की 75 प्रतिशत राशि पर प्रति वर्ष 5 प्रतिशत ब्याज अनुदान दिया जाता है, जिसकी अधिकतम सीमा ₹25 हजार वार्षिक निर्धारित है।
आचार्य विद्यासागर गौ संवर्धन योजना के माध्यम से जिले में अनेक पशुपालक सफलतापूर्वक डेयरी इकाइयाँ स्थापित कर चुके हैं। इससे न केवल उनकी आय में वृद्धि हो रही है, बल्कि ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार के नए अवसर सृजित होने के साथ-साथ दुग्ध उत्पादन में भी उल्लेखनीय बढ़ोतरी हो रही है। यह योजना पशुपालकों के लिए आत्मनिर्भरता की दिशा में एक सशक्त और प्रभावी पहल के रूप में उभर रही है।

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