वृंदावन समाचार: महाराज जी ने बताए गृहस्थ जीवन में भक्ति के सरल सूत्र

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पांढुरना संवाददाता- निलेश कलस्कर (जिला ब्युरो चिफ)

वृंदावन। सत्संग के दौरान एक जिज्ञासु के प्रश्न का उत्तर देते हुए पूज्य संत प्रेमानंद महाराज ने स्वास्थ्य और भक्ति के तालमेल पर विशेष चर्चा की। उन्होंने स्पष्ट किया कि शरीर की प्रतिकूलता के बावजूद मन को राधा नाम में कैसे जोड़े रखें।

आज के प्रश्नोत्तर के मुख्य अंश:

स्वास्थ्य और साधना: महाराज जी ने बताया कि उनका शरीर केवल राधा कृपा से चल रहा है। उन्होंने भक्तों को सीख दी कि बीमारी शरीर का धर्म है, उसे भोगते हुए भी अपनी जिह्वा से नाम जप नहीं छोड़ना चाहिए।

क्रोध पर नियंत्रण: एक भक्त के सवाल पर उन्होंने कहा कि क्रोध आने पर तुरंत मौन हो जाना चाहिए। क्रोध भक्ति की कमाई को नष्ट कर देता है।

परम लक्ष्य: उन्होंने जोर देकर कहा कि मनुष्य जन्म केवल खाने-कमाने के लिए नहीं, बल्कि प्रभु प्राप्ति के लिए मिला है। संसार के कार्य करते हुए भी मन भगवान में लगा रहना चाहिए।

स्वास्थ्य अपडेट:

महाराज जी का स्वास्थ्य स्थिर है और वे नियमित रूप से भक्तों को दर्शन दे रहे हैं। उनके ‘पद संचालन’ (रात्रि पदयात्रा) में अभी भी भारी संख्या में श्रद्धालु उमड़ रहे हैं।

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