पांढुर्ना CEO विवाद: क्या सुलह सिर्फ दिखावा है? (अपडेट)

संवाददाता- निलेश कलसकर जिला ब्युरो चिफ जिला पांढुरना
पांढुरना – जनपद पंचायत पांढुर्ना में मुख्य कार्यपालन अधिकारी (CEO) के खिलाफ सरपंचों और सचिवों के सामूहिक विद्रोह का मामला अब एक नया मोड़ ले चुका है।
शुरुआत में, सरपंच संघ ने CEO पर अभद्र व्यवहार और मानसिक उत्पीड़न का आरोप लगाते हुए कलेक्टर को आवेदन दिया था, जबकि सचिव संघ ने सामूहिक छुट्टी पर जाने का आवेदन दिया था।
लेकिन, संगठन द्वारा जारी नवीनतम प्रेस नोट के अनुसार, पंचायत सचिव/सहायक सचिव संयुक्त संगठन की कोर कमेटी ने CEO मैडम के साथ चर्चा की है।
दावा: संगठन ने दावा किया है कि उनकी सभी समस्याओं का निराकरण CEO मैडम द्वारा कर दिया गया है।
स्थिति: इस घोषणा के बाद, सभी सचिव/सहायक सचिव दिनांक 08/12/2025 से अपने कार्य स्थल पर वापस काम करने लगे हैं।
अनसुलझे सवाल
सचिवों की तरफ से आधिकारिक तौर पर मामला शांत होने के बावजूद, मूल खबर में उठाए गए गंभीर संदेह अभी भी बने हुए हैं:
मूल ‘दिक्कत’ क्या थी?: सरपंचों और सचिवों की सामूहिक बगावत का असली कारण सिर्फ ‘दुर्व्यवहार’ था, या यह पंचायतों के वित्तीय लेन-देन और भ्रष्टाचार को छुपाने के दबाव से जुड़ा था, जैसा कि सूत्रों ने संकेत दिया था?
त्वरित सुलह पर संदेह: जिस बड़े स्तर पर यह विवाद सार्वजनिक हुआ था, उसके बाद इतनी जल्दी और गोपनीय तरीके से समस्या का ‘निराकरण’ हो जाना संदेह पैदा करता है कि क्या यह सुलह जनहित की है या किसी बड़े वित्तीय अनियमितता को दबाने की कोशिश?
सरपंच संघ का रुख: सचिवों ने भले ही काम पर लौटने की घोषणा कर दी हो, लेकिन सरपंच संघ के आंदोलन की चेतावनी और CEO पर लगाए गए आरोप पर अभी कोई स्पष्ट आधिकारिक अपडेट नहीं आया है।
मामले की गंभीरता और वित्तीय अनियमितता के संदेह को देखते हुए, जिला प्रशासन से गहन और निष्पक्ष जांच की मांग अभी भी प्रासंगिक है।