तालाबों में मगरमच्छों का डेरा, ज़मीनी अमला गायब — ग्रामीण खौफ़ के साए में जीने को मजबूर 

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प्राइड इंडिया न्यूज़ सीधी, रिपोर्ट : शाहिद खान

 

मध्य प्रदेश के सीधी जिले के जनपद पंचायत सिहावल क्षेत्र अंतर्गत पंचायतों के तालाबों मे मगरमच्छ का डेरा! मरसरहा क्षेत्र में तालाबों के किनारों पर ख़ौफ़ का साया गहराता जा रहा है। ग्राम पंचायत मरसरहा के चमन और आसपास की पंचायतों—अमिलिया, पमरिया पहाड़ी और मरसरहा—के विभिन्न तालाबों में दो-दो मगरमच्छों की मौजूदगी ने ग्रामीणों की रातों की नींद छीन ली है। सोन घड़ियाल अभ्यारण्य की नदियों से भटककर तालाबों में डेरा जमाए ये मगरमच्छ अब आम ज़िंदगी के बीच खामोश खतरे की तरह घूम रहे हैं। लोगों का कहना है कि वर्षों से ये अजगर-नज़र खतरे की घंटियाँ बजा रहे हैं, मगर जिम्मेदार महकमे ने अब तक एक झलक तक लेना मुनासिब नहीं समझा।

 

अजीब विडंबना यह है कि सरकार करोड़ों रुपये संरक्षण योजनाओं पर बहा रही है, मगर सोन घड़ियाल विभाग के अधिकारी-कर्मचारी अपनी कुर्सियों से आगे कदम बढ़ाने को तैयार नहीं। न निरीक्षण, न गश्त, न ही ग्रामीणों को किसी तरह की चेतावनी—सब कुछ बस कागज़ों में चल रहा है। हालात यह हैं कि जब नदियाँ रेत खनन से खोखली होती जा रही हैं, तब वन्यजीव अपनी पनाहगाह छोड़कर गाँवों की तरफ कूच कर रहे हैं; और विभाग अपनी नींद से जागने का नाम नहीं ले रहा।

 

ग्रामीणों की दहशत अब खामोश चीख़ बनकर फैलने लगी है। तालाबों के किनारे खेलते बच्चे हों या पानी भरने जाती महिलाएँ—हर कदम पर एक अंजाना ख़तरा मंडरा रहा है। लोग कहते हैं, “सरकार मगरमच्छ बचाने में लगी है, मगर ज़मीनी अमला अपने कमरों में दुबका हुआ है।” नतीजतन गाँवों की आबो-हवा में डर का रंग गहरा होता जा रहा है और जिम्मेदार आँखें अब भी अंधेरे में डूबी हुई हैं।

 

प्राइड कदम हिंदी समाचार एवं प्राइड इंडिया न्यूज़ सीधी (मध्य प्रदेश)

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