दुग्ध समृद्धि संपर्क अभियान” या फिर जमीनी सच्चाई का मुखौटा?

प्राइड इंडिया न्यूज़ सीधी,
रिपोर्ट — शाहिद खान
गांधी जयंती के अवसर पर 2 अक्टूबर से 9 अक्टूबर तक पूरे प्रदेश में “दुग्ध समृद्धि संपर्क अभियान” चलाया जा रहा है। सरकार कहती है — यह दुग्ध उत्पादन दोगुना करने की दिशा में बड़ा कदम है।
पर जरा ज़मीनी हकीकत पर नजर डालिए…
कागज़ों में समृद्धि, ज़मीन पर सूनी गौशालाएँ
कलेक्टर स्वरोचिष सोमवंशी ने अभियान के प्रभावी क्रियान्वयन के निर्देश तो जारी कर दिए, लेकिन सवाल यह है — जब किसान के पास अब पशुधन ही नहीं बचा, तो दुग्ध समृद्धि किससे होगी?
पिछली पशुगणना में जो संख्या दर्ज थी, अब वे पशु या तो मर चुके हैं या सड़कों पर लावारिस घूम रहे हैं।
गाँवों में लौट आया ‘होरी महतो’ का दौर
आज का किसान प्रेमचंद की कहानी “पूश की रात” के होरी महतो की तरह अपने भाग्य को कोस रहा है।
कर्ज, महंगाई, और चरागाहों की कमी ने उसकी पशुपालन परंपरा को निगल लिया है।
फर्जी पशुगणना से उठे सवाल
वहीं विभागीय स्तर पर चल रही पशुगणना ने भी कई सवाल खड़े कर दिए हैं।
स्थानीय युवाओं का कहना है कि पशुगणना का काम टेंडर पर बेरोजगार युवकों को देकर, मोबाइल नंबरों के सहारे फर्जी डेटा भरा जा रहा है।
जब आंकड़े ही झूठे होंगे, तो नीति कितनी सच्ची मानी जाए?
प्रशासनिक पहल की दरकार
अगर प्रशासनिक व्यवस्था जमीनी स्तर पर ईमानदारी से काम करे, तो हालात कुछ सुधर सकते हैं।
वरना यह अभियान भी बाकी योजनाओं की तरह सिर्फ पोस्टर, बैठकें और प्रेस विज्ञप्तियों तक सीमित रह जाएगा।
सवाल जनता का — दुग्ध समृद्धि कब, कैसे और किससे?
जब किसान के पास पशु नहीं, चारा नहीं, और सहारा नहीं,
तो “दुग्ध समृद्धि संपर्क अभियान” आखिर किस समृद्धि की बात करता है?