सिंगरौली में सत्ता संग्राम: निगमाध्यक्ष पर पार्षदों का अविश्वास, विधायक बोले — “किसी की हिम्मत नहीं जो प्रस्ताव पास करवा सके”

रिपोर्ट: सुनील पांडे | सिंगरौली
मध्य प्रदेश की स्थानीय निकाय राजनीति एक बार फिर गरमाई हुई है। सागर, देवरी और गुना के बाद अब सिंगरौली में भी नगर निगम अध्यक्ष और पार्षदों के बीच सत्ता संघर्ष खुलकर सामने आ गया है।
यहां कांग्रेस, आम आदमी पार्टी, बीएसपी और निर्दलीय पार्षदों ने निगम अध्यक्ष देवेश पांडेय के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव लाने के लिए कलेक्टर को आवेदन सौंपा है। इससे सियासी तापमान तेजी से बढ़ गया है।
विधायक का पलटवार — “हमारे पास पर्याप्त संख्या बल”
विपक्ष के इस कदम के बाद भारतीय जनता पार्टी विधायक रामनिवास शाह और निगम अध्यक्ष देवेश पांडेय ने संयुक्त प्रेस कॉन्फ्रेंस कर विपक्ष के आरोपों को सिरे से खारिज किया।
विधायक शाह ने कहा —
“हमारे पास पूरा संख्या बल है, किसी में इतनी हिम्मत नहीं कि हमारे अध्यक्ष के खिलाफ प्रस्ताव पास करवा सके। विपक्ष के कुछ पार्षद भी हमारे संपर्क में हैं। अगर वोटिंग की नौबत आई तो 5 से 6 पार्षद हमारे पक्ष में आएंगे।”
“मेयर के भ्रष्टाचार उजागर किए, इसलिए साजिश”
निगमाध्यक्ष देवेश पांडेय ने इसे विपक्ष की “डर्टी पॉलिटिक्स” करार देते हुए कहा कि—
“हमने आम आदमी पार्टी की महापौर रानी अग्रवाल के भ्रष्टाचार की फाइलों पर कार्यवाही की है। उन्हीं मामलों को छुपाने के लिए यह पूरा प्रोपेगेंडा रचा जा रहा है।”
संख्या बल की जंग: किसके पाले में बढ़त?
अविश्वास प्रस्ताव का आवेदन कलेक्टर को सौंपे जाने के बाद से शहर की राजनीति में उबाल है। दोनों ही पक्ष संख्या बल दिखाने में जुटे हुए हैं।
हालांकि नियम के मुताबिक 10 दिन की प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही यह स्पष्ट होगा कि अविश्वास प्रस्ताव सदन में पेश होगा या नहीं, और किसके पास बहुमत रहेगा।
सिंगरौली की राजनीति में यह मामला अब सिर्फ सत्ता की रस्साकशी नहीं, बल्कि “पारदर्शिता बनाम प्रतिशोध” की लड़ाई का रूप ले चुका है।