कृषि सखियों ने स्वयं तैयार किए जैविक उत्पाद बीजामृत, जीवामृत 

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जिला ब्यूरो मनोज कुमार यादव कि रिपोर्ट

 

 प्राकृतिक खेती मृदा एवं मानव स्वास्थ्य के लिए महत्वपूर्ण

 

डिंडोरी, ज्ञात हो कि कृषि विज्ञान केन्द्र डिंडोरी के स्वामी विवेकानंद सभागार में राष्ट्रीय प्राकृतिक खेती मिशन के अंतर्गत प्राकृतिक खेती पर कृषि सखियों का पांच दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम दिनांक 25 से 29 सितंबर 2025 तक आयोजित किया जा रहा है । इसी क्रम में आज कृषि सखियों ने प्रक्षेत्र पर मास्टर ट्रेनर डॉक्टर गीता सिंह एवं श्री अवधेश कुमार पटेल के मार्गदर्शन में बीजामृत एवं जीवामृत प्रायोगिक रूप से स्वयं तैयार किया। बीजामृत का उपयोग बीज उपचार हेतु किया जाता है एवं जीवामृत का उपयोग फसलों में वृद्धिवर्धक टॉनिक की तरह उपयोग किया जाता है। 100 किलोग्राम बीज को उपचारित करने हेतू बीजामृत बनाने के लिए 5 किलोग्राम देसी गाय का गोबर, 5 लीटर गौमूत्र, 50 ग्राम खाने का चूना, 500 ग्राम खेत की मिट्टी, एवं 20 लीटर पानी की आवश्यकता होती है। इन सभी पदार्थों को पानी में घोलकर 24 घंटे तक रखना है । इसे दिन में दो बार लकड़ी के डंडे से घड़ी की सुई की दिशा में घुमाना है । बीजों के ऊपर बीजामृत को छिड़ककर या बीज को बीजामृत में डुबोकर उपचारित कर सुखाकर बुवाई करनी है । प्रशिक्षण के दौरान श्री अवधेश पटेल ने पशुधन के समन्वयन से

प्राकृतिक खेती की अवधारणा, सिद्धांत अभ्यास एवं सभी प्रकार के बीजों की जानकारी, पौध सामग्री, बीज उपचार और बीज एवं पौध रोपण की विधियां के बारे में विस्तार से जानकारी प्रदान की। श्रीमति रेनू पाठक ने स्वास्थ्य एवं सफाई संबंधी विभिन्न आयामों पर प्रकाश डाला। डॉ मनीषा श्याम ने फसल विविधीकरण एवं उन्नत किस्मों की जानकारी दी। डा गीता सिंह ने कृषि सखियों को मृदा परीक्षण की विधि, नमूना एकत्रीकरण, केंचुआ खाद उत्पादन जैविक विधियों से फसलों के कीट एवं रोगों के निवारण हेतू ब्रह्मास्त्र, नीमास्त्र, अग्नि अस्त्र बनाने की विधि एवं उपयोग का तरीका बताया। डॉ गीता सिंह ने कृषि की मुख्य समस्या चूहा एवं दीमक नियंत्रण हेतू कई आसान उपाय बताए। अंत में कुर्सी दौड़ प्रतियोगिता का आयोजन किया गया जिसमें सभी ने उत्साह से भाग लिया विजेताओं को पुरस्कृत भी किया गया।

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