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पूस की रात आज भी जिंदा: आवारा पशुओं से जूझता सीधी का किसान

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पूस की रात आज भी जिंदा: आवारा पशुओं से जूझता सीधी का किसान

 

प्राइड इंडिया न्यूज़,सीधी l रिपोर्ट : शाहिद खान

 

सीधी जिले के जनपद क्षेत्र सिहावल अंतर्गत ग्राम पंचायत अमिलिया चुरहट मुख्य चौराहा एवं सिहावल इन दिनों आवारा पशुओं का अड्डा बन गया है। जिस तरह कभी प्रेमचंद ने पूस की रात में अन्नदाता की बेबसी दिखाई थी, वैसी ही तस्वीर आज 21वीं सदी के भारत में भी झलक रही है।

 

बरसात की कमी, महंगे खाद और यूरिया की मार झेल रहे किसान अब आवारा पशुओं से परेशान हैं। उनकी दिन-रात की मेहनत की फसल खुलेआम चर जाती है और जिम्मेदार तंत्र पूरी तरह मौन है।

 

पिछले सत्र में विधायक विश्वामित्र पाठक ने इस समस्या पर पहल की थी, लेकिन इस बार किसी स्तर पर ठोस कदम नहीं उठाया गया। जो शासकीय गौशालाएँ बनकर तैयार हो चुकी हैं, वे भी ताले में बंद पड़ी हैं। वहीं, जो गौशालाएँ संचालित हो रही हैं, उनकी व्यवस्थाएँ नाममात्र की हैं।

 

सीधी के सांसद लोकसभा में किसानों की आवाज उठाते तो हैं, लेकिन ज़मीनी हकीकत बैठक और कागज़ तक ही सीमित रह जाती है। मऊगंज कलेक्टर ने स्पष्ट आदेश दिया था कि ग्राम पंचायत के सचिव, सरपंच और सहायक सचिव आवारा पशु समस्या के लिए जिम्मेदार माने जाएंगे, लेकिन सीधी जिले में अब तक ऐसे किसी आदेश की चर्चा तक नहीं है।

 

प्रशासन की चुप्पी और उदासीनता ने किसानों की परेशानी को और बढ़ा दिया है। सवाल यह है कि क्या अन्नदाता को यूँ ही अपनी मेहनत पर आवारा पशुओं और तंत्र की लापरवाही की मार झेलनी होगी?

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