स्थानीय स्तर पर नहीं हो रहा समस्या का समाधान 70 साल बाद भी सड़क का इंतजार: लटेरा टोला के ग्रामीण अब कलेक्टर तक ले जाएंगे अपनी आवाज
स्थानीय स्तर पर नहीं हो रहा समस्या का समाधान 70 साल बाद भी सड़क का इंतजार: लटेरा टोला के ग्रामीण अब कलेक्टर तक ले जाएंगे अपनी आवाज

रिपोर्टर सोहन श्याम बजाग डिंडौरी
डिंडौरी जिले के करंजिया विकासखंड अंतर्गत ग्राम पंचायत रामनगर के पोषक गांव लटेरा टोला के नागरिक आजादी के सात दशक बाद भी मूलभूत सुविधाओं के अभाव में जीवन व्यतीत करने मजबूर हैं।दरअसल यहां के निवासियों को ग्राम से हाइवे मार्ग तक चलकर आने के लिए अब तक पक्के सड़क की सुविधा नसीब नहीं हैं। गांव तक जाने के लिए आज भी लोगों को कच्चे रास्ते और कीचड़ भरे गड्ढों से होकर गुजरना पड़ता हैं। जो इनके लिए दुख दर्द का कारण बन गया हैं स्थानीय लोगों की मानें तो आम दिनों में किसी तरह आवागमन कर लेते हैं किन्तु बरसात के चार माह उनके लिए काला पानी जैसा दंड से कम नहीं रहता क्योंकि इन दिनों में कच्चा मार्ग बड़े बड़े गढ्ढों में तब्दील होकर कीचड़ से सराबोर रहता हैं जहां से पैदल चलना भी मुनासिब नहीं होता हालात और भी बदतर हो जाते हैं, लेकिन अन्य कोई वैकल्पिक मार्ग नहीं हैं इसलिए गिरते पड़ते ही सही इसी रास्ते से चलने की मजबूरी है और स्कूल जाने वाले बच्चों से लेकर बुजुर्ग तक को इस का सामना करते हैं।
ग्रामीणों का कहना है कि हमारा गांव जनपद मुख्यालय से अधिक दूरी पर नहीं हैं केवल पांच किलोमीटर दूर पर हैं लेकिन शासन प्रशासन के जवाबदारों ने अब तक सुध नहीं लिया जबकि प्राथमिकता के साथ हल निकालना चाहिए था यघपि सालों से नेता और पंचायत प्रतिनिधियों को समस्या बताने के बावजूद समाधान नहीं निकला इससे ऐसा आभास होता हैं कि जवाबदार हमें सुविधाएं देने में रुचि नहीं रखते। बहरहाल नाराज ग्रामीण अब चेतावनी दे रहे हैं कि यदि जल्द ही सड़क निर्माण का काम शुरू नहीं हुआ तो वे कलेक्टर तक अपनी बात ले जाएंगे।
बरसात में दलदल बन जाती है सड़क
लटेरा टोला तक पहुंचने वाला रास्ता बरसात के दिनों में दलदल में बदल जाता है। गांव के बच्चों को स्कूल जाने के लिए कई किलोमीटर पैदल चलना पड़ता है। अक्सर फिसलने और चोट लगने की घटनाएँ सामने आती रहती हैं। गांव के बुजुर्गों और बीमार लोगों को अस्पताल ले जाना किसी चुनौती से कम नहीं है।
ग्रामीणों के वर्जन (बयान)
छोटा सिंह पंदराम का कहना है –
सड़क न होने से हमारी जिंदगी मुश्किल हो गई है। बच्चे स्कूल जाने में देर करते हैं, महिलाएँ बाजार तक नहीं जा पातीं और बीमार पड़ने पर समय पर इलाज मिलना मुश्किल होता है।
तितरा सिंह मरावी ने कहा –
गांव में सड़क न होने से बच्चों की पढ़ाई पर सबसे ज्यादा असर पड़ रहा है। बारिश के समय बच्चे कई दिन स्कूल नहीं जा पाते।
शिवराम सिंह धुर्वे का कहना है
यदि किसी को अचानक अस्पताल ले जाना पड़ जाए तो गाड़ी गांव तक नहीं आ पाती। स्ट्रेचर या चारपाई पर मरीज को बाहर तक ले जाना पड़ता है।
ज्ञान सिंह नेटी ने बताया
आज़ादी को 70 से ज्यादा साल हो गए, लेकिन हमारी सड़क आज तक नहीं बनी। नेता आते हैं, वादे करते हैं, लेकिन काम पूरा नहीं होता। अगर सड़क नहीं बनी तो हम सब मिलकर कलेक्टर ऑफिस जाएंगे।”
अमृत सिंह मरावी का कहना है –
सड़क न बनने से खेती-किसानी का काम भी प्रभावित होता है। धान या कोसा की फसल बाजार तक पहुंचाने में दिक्कत होती है।
धनश्याम सिंह धुर्वे ने नाराज़गी जताते हुए कहा –
हमारी समस्या को सुनने वाला कोई नहीं है। अब हम प्रशासन से न्याय मांगेंगे। जरूरत पड़ी तो आंदोलन भी करेंगे।
जनप्रतिनिधि नहीं दे रहे जवाब
जब इस मामले में ग्राम पंचायत रामनगर के सरपंच से सच्चाई और पक्ष जानने फोन से संपर्क करने की कोशिश की गई, लेकिन उन्होंने फोन नहीं उठाया। ग्रामीणों का आरोप है कि पंचायत के चुनाव के समय तो जनप्रतिनिधि वोट मांगने गांव आते हैं, लेकिन जीतने के बाद वे समस्याओं की ओर ध्यान नहीं देते।
मानव जीवन से जुड़ा मुद्दा
लटेरा टोला की सड़क समस्या महज़ एक विकास कार्य न होने की बात नहीं है, बल्कि यह लोगों की रोजमर्रा की जिंदगी और मानव जीवन से जुड़ा सवाल है। गांव के बच्चों का भविष्य, बुजुर्गों का स्वास्थ्य और महिलाओं की सुरक्षा सीधे तौर पर इस सड़क पर निर्भर है।
स्थानीय लोगों का कहना है कि सरकार सड़क हर घर तक” की योजनाओं की घोषणा करती है, लेकिन हकीकत में जमीनी स्तर पर लटेरा टोला जैसे गांव आज भी बुनियादी सुविधा से वंचित हैं।
सरकार और प्रशासन की जिम्मेदारी – गांववालों का कहना है कि उन्होंने कई बार पंचायत और जनपद स्तर पर अधिकारियों से समस्या बताई है, और लिखित शिकायत भी किया है लेकिन हर बार सिर्फ कोरा आश्वासन ही मिला है। फलस्वरूप अब ग्रामीणों ने ठान लिया है कि यदि समस्या का समाधान शीघ्र नहीं हुआ तो वे सामूहिक रूप से कलेक्टर के पास जाएंगे।