*संतानो की खुशहाली एवं लंबी उम्र के लिये माताओं का संतान सप्तमी व्रत आज! पूजा विधि, महत्व और कथा-*

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*संतानो की खुशहाली एवं लंबी उम्र के लिये माताओं का संतान सप्तमी व्रत आज! पूजा विधि, महत्व और कथा-*

विशेष रिपोर्ट राकेश शर्मा – संतान सप्तमी का यह व्रत भाद्रपद माह के शुक्ल पक्ष की सप्तमी तिथि को मनाया जाता है, जो 29 अगस्त 2025 को शाम 5 बजकर 54 मिनट से शुरू होकर 30 अगस्त को रात्रि 7 बज कर 58 मिनट तक रहेगी! इस लिए उदया तिथि के अनुसार यह व्रत 30 अगस्त को किया जाएगा।संतान सप्तमी का व्रत संतान की खुशहाली, दीर्घायु और संतान प्राप्ति के लिए किया जाता है।

यह पर्व भगवान शिव और माता पार्वती को समर्पित है! इस दिन शुभ मुहूर्त में भगवान शिव और माता पार्वती की पूजा की जाती है! व्रत के दौरान बिना नमक के फलाहार किया जाता है, तथा भगवान को मालपुआ, पूरी और खीर का भोग लगाया जाता है! यह व्रत सुहागिन महिलाएं संतान सुख, आरोग्य और लंबी आयु के लिए भगवान शिव और मां पार्वती को समर्पित होकर करती हैं! इस व्रत में मीठे पकवान बनाए जाते हैं, नमक का सेवन वर्जित होता है, और पूजा में भगवान शिव और मां पार्वती की विधि-विधान से पूजा की जाती है!यह व्रत संतान से जुड़ी सभी प्रकार की समस्याओं को दूर करने में सहायक होता है!

*पूजा विधि*
1. प्रभु की आराधना-इस दिन भगवान शिव और मां पार्वती की पूजा की जाती है!
2. पुए या गुलगुले-पूजा में मीठी पूरियां या गुलगुले बनाए जाते हैं और उन्हें भगवान को चढ़ाया जाता है!
3. कथा का श्रवण-पूजा के दौरान संतान सप्तमी की कथा का पाठ या श्रवण किया जाता है!
4. व्रत खोलना-व्रत खोलने के लिए सात मीठी पूरियां खाई जाती हैं और बाकी सात पूरियां दान कर दी जाती हैं!
5. अशक्त वस्तुएं-इस व्रत में नमक से बनी चीजें नहीं खाई जाती हैं!

*संतान सप्तमी से जुड़ी कथा*- पौराणिक कथा के अनुसार, अयोध्या के राजा नहुष की पत्नी चंद्रमुखी और एक ब्राह्मण की पत्नी रूपवती ने एक साथ संतान प्राप्ति के लिए यह व्रत करने का निश्चय किया, लेकिन व्रत की विधि भूल जाने के कारण उन्हें पशु योनी में जन्म लेना पड़ा! बाद में उन्होंने मनुष्य योनी में जन्म लिया और जब उन्होंने विधिपूर्वक व्रत का पालन किया, तो उन्हें संतान सुख की प्राप्ति हुई।

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