भारतीय अर्थव्यवस्था को चुनौती पेश करता हुआ ट्रंप टैरिफ,

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सीधी (राकेश शर्मा) 27 अगस्त 2025 की आधी रात्रि से पचास परसेंट लागू हुआ अमेरिकी टैरिफ! जो भारत के लिए किसी बड़े झटके से कम नहीं है!भारत द्वारा अमेरिका को निर्यात होने वाले 8000 करोड़ रुपए के निर्यात पर संकट के बादल छाए हुए हैं। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा भारत से अमेरिकी व्यापार घाटे को कम करने एवं अमेरिका के डेयरी उत्पादों के लिए भारत का बाजार खुलवाने के लिए यह सारे दांव पेंच चले जा रहे हैं।जो कि भारत में किसी भी हाल में संभव नहीं है।

 

भारत द्वारा अमेरिका को भेजे जाने वाले इंजीनियरिंग सामान, इलेक्ट्रॉनिक उपकरण, फार्मास्यूटिकल्स, रत्न और आभूषण, वस्त्र, तेल और पेट्रोलियम उत्पाद मशीनरी, कंप्यूटर, सर्किट बोर्ड, रेडीमेड गारमेंट्स (विशेष रूप से कॉटन आधारित),कटिंग और पॉलिश किए हुए हीरे, तथा दवाएं शामिल हैं। पर्यटकों द्वारा खरीदी गई वस्तुएँ और हस्तशिल्प भी भेजे जाते हैं।कृषि उत्पादों में भारत अमेरिका को बड़ी मात्रा में चावल का एक्सपोर्ट करता है।कुल मिलाकर अभी भारत के लिए सदमे की स्थिति है।

 

लेकिन भारत अपनी आर्थिक नीतियों को घरेलू अर्थव्यवस्था को बढ़ाने वाली नीतियां बनाकर इस घाटे से उबर सकने में समर्थ है। विशेषज्ञों का मानना है कि इस स्थिति में भारत में जीएसटी की मैक्सिमम स्लैब दरें 15% से अधिक नही होनी चाहिए। तथा डीजल के दामों में तुरंत प्रभाव से कटौती होनी चाहिए, देश में महंगी टोल दरों को घटाया जाना चाहिए।आवश्यक सुधार के लिए वह सभी जरूरी कदम उठाने चाहिए,जिससे देश में उत्पादन लागत दरें कम हो, बेहतर ट्रांसपोर्टेशन हो। इन सभी बातों के लिए सरकार को बड़े दिलवाला होना होगा।

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