सिहावल कन्या प्राथमिक शाला में पानी का घोर संकट: प्यास बुझाना तो दूर, शौचालय के लिए भी बच्चियां घर से लाती हैं पानी

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प्राईड इंडिया न्यूज़ सिहावल से संवाददाता सूरज केवट की खास रिपोर्ट

 

सीधी, सिहावल।

मुख्यालय से महज 500 मीटर दूरी पर स्थित शासकीय कन्या प्राथमिक शाला सिहावल 1950 से संचालित है, लेकिन आज अपनी बदहाली पर आंसू बहा रही है। विद्यालय की इमारत जर्जर हो चुकी है, जहां बच्चियां रोजाना जान जोखिम में डालकर पढ़ाई करने को मजबूर हैं। कई बार खबर प्रकाशित होने के बाद भी न तो नई बिल्डिंग का निर्माण हुआ और न ही मरम्मत कराई गई, जिससे किसी बड़े हादसे का खतरा बना हुआ है।

 

शौचालय है, पर पानी नहीं

विद्यालय में शौचालय तो बना है, लेकिन पानी के अभाव में बच्चियों को उसका उपयोग करने के लिए तालाब का सहारा लेना पड़ता है। यह स्थिति न केवल असुविधा बढ़ाती है बल्कि हादसे की आशंका भी बनी रहती है।

 

मिड-डे मील पर भी असर

पानी की कमी से मध्यान्ह भोजन बनाने में भी दिक्कतें आती हैं। पहले विद्यालय परिसर में एक हैंडपंप था, लेकिन शासन की नल-जल योजना के तहत पाइप निकालकर घटिया शेड बना दिया गया, जिससे बोर धराशायी हो गया। अब विद्यालय ही नहीं, बल्कि आसपास के व्यापारी और राहगीर भी पानी की समस्या से जूझ रहे हैं।

 

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