जिले में भारी बारिश में भी रक्षाबंधन की रौनक, बाजारों में राखी और मिठाई,नारियल की जबरदस्त खरीदारी,
अरविंद दुवेदी की रिपोर्ट
सावन की झमाझम बारिश भी भाई-बहन के पवित्र रिश्ते में रंग भरने वाले रक्षाबंधन के उत्साह को फीका नहीं कर सकी। बुधवार को सुबह से ही शहर और कस्बों में तेज बारिश होती रही, सड़कों पर पानी भर गया, फिर भी महिलाओं और बच्चियों का उत्साह कम नहीं हुआ। बाजारों में सुबह से ही भीड़ उमड़ने लगी।
रंग-बिरंगी राखियों से सजी दुकानों पर महिलाएं और युवतियां अपने भाइयों के लिए पसंदीदा राखियां चुनती रहीं। वहीं, मिठाई की दुकानों पर ग्राहकों की लंबी कतारें लगी रहीं। बारिश में भीगते हुए लोग अपने साथ मिठाई के डिब्बे और उपहार पैकेट लेकर घर लौटते दिखाई दिए।
दुकानदारों के मुताबिक, मौसम खराब होने के बावजूद बिक्री में कोई कमी नहीं आई, बल्कि त्योहार के दिन उत्साह पहले से ज्यादा देखने को मिला। बच्चों से लेकर बुजुर्गों तक सभी में रक्षाबंधन का उल्लास साफ झलक रहा था। बारिश, भीड़ और त्योहार की रौनक – तीनों ने मिलकर सीधी की गलियों को पूरे दिन जीवंत बनाए रखा।
हिंदू धर्म के प्रमुख त्योहारों में से एक रक्षाबंधन का त्योहार इस साल 9 अगस्त 2025, शनिवार को मनाया जाएगा। पंचांग के अनुसार, हर साल सावन मास की पूर्णिमा तिथि पर रक्षाबंधन मनाया जाता है, जो भाई-बहन के पवित्र रिश्ते को समर्पित है। इस दिन बहनें अपने भाइयों की कलाई पर राखी बांधती हैं और उनके सुख-समृद्धि और खुशहाल जीवन की कामना करती हैं। वहीं बदले में भाई अपनी बहन को रक्षा का वचन देते हैं और उन्हें उपहार देकर अपना प्रेम जाहिर करते हैं। लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि आखिर राखी मनाने की परंपरा कैसे शुरू हुई? आपको बता दें कि इस त्योहार से जुड़ी कई पौराणिक कथाएं प्रचलित हैं, लेकिन सबसे प्रसिद्ध और रोचक कथा राजा बलि और माता लक्ष्मी से जुड़ी हुई है।
कथा के अनुसार, एक बार जब राक्षसों के राजा बली ने अपनी भक्ति और तप से भगवान विष्णु को प्रसन्न कर लिया, तो उन्होंने उनसे अपनी रक्षा का वचन मांगा। भगवान विष्णु ने वादा निभाते हुए बली के द्वारपाल बन गए। इससे देवी लक्ष्मी चिंतित हो उठीं। ऐसे में देवी लक्ष्मी साधारण स्त्री का रूप धारण कर बली के पास पहुंचीं और उसे राखी बांध दी। बली भावुक हो गया और उन्हें मनचाही इच्छा मांगने को कहा। इस पर देवी लक्ष्मी ने भगवान विष्णु को द्वारपाल से मुक्त करने का वचन मांगा।
भगवान श्रीकृष्ण और द्रौपदी की कथा,
एक अन्य पौराणिक कथा के अनुसार, एक बार श्रीकृष्ण को उंगली में चोट लग गई, जिससे रक्त बहने लगा। यह देखकर द्रौपदी परेशान हो गई और उन्होंने तुरंत अपनी साड़ी का एक टुकड़ा फाड़कर श्रीकृष्ण की उंगली पर बांध दिया। द्रौपदी के इस प्रेम से श्रीकृष्ण अत्यंत भावुक हो गए और उन्होंने वचन दिया कि जब भी द्रौपदी पर कोई संकट आएगा, वे उनकी रक्षा करेंगे,