जनपद पंचायत मंडला के ग्राम पंचायत तिंदनी में सरपंच के द्वारा किया गया पत्रकारों पर जानलेवा हमला,

(रिपोर्ट–भगवती प्रसाद दुबे, जिला ब्यूरो–मंडला)
मंडला में लोकतंत्र को लहूलुहान करने की साज़िश के चलते पत्रकार भाइयों पर जानलेवा हमले हो रहे हैं,
मंडला जिले में पत्रकारों पर हमले अब आम बात बनती जा रही है, शुक्रवार को दो पत्रकारों पर ग्राम पंचायत–तिदनी के सरपंच और उसके गुंडों द्वारा हमला किया गया है l
जानलेवा हमला इस बात का जीता-जागता उदाहरण है। ये केवल दो लोगों पर हमला नहीं, ये सच पर हमला है, कलम की ताकत को कुचलने की कोशिश की जा रही है।
सवाल ये है कि इन हमलावरों के हौसले इतने बुलंद कैसे हो रहे हैं कुछ ताक़तवर हाथ हैं जो इन सरपंचों और उनके गुंडों की पीठ थपथपा रहे हैं?
हर बार धमकी देकर पत्रकारों को झूठे केस में फंसाने की कोशिश की जाती है? मंडला अब अपराधियों की शरणस्थली बन चुका है?
मध्य प्रदेश के मंडला जनपद में पत्रकारों पर हमले की घटना निंदनीय है।
आशीष चौधरी और प्रदीप शर्मा पर जानलेवा हमला तब हुआ जब वे भ्रष्टाचार की आशंका से सूचना का अधिकार लगाकर जानकारी मांगने के लिए ग्राम पंचायत तिदनी पहुंचे थे।
सरपंच शैलेंद्र उइके पर आरोप है कि उन्होंने अपने गुंडों के साथ मिलकर पत्रकारों को अगवा करने की कोशिश की और जान से मारने की कोशिश की। दोनों पत्रकार अपनी जान बचाकर भागने में सफल रहे और कोतवाली थाने में शिकायत दर्ज कराई।
पत्रकारों पर हमले की घटनाएं चिंताजनक हैं और लोकतंत्र के चौथे स्तंभ पर हमला है। ऐसे मामलों में प्रशासन को सख्त कार्रवाई करनी चाहिए ताकि पत्रकारों की सुरक्षा सुनिश्चित हो सके।
पत्रकारों के अधिकार और सुरक्षा
अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और जीवन का अधिकार है। उन्हें कार्य की स्वतंत्रता और सुरक्षा मिलनी चाहिए।
पत्रकारों पर हमले और धमकी को युद्ध अपराध माना जा सकता है।प्रशासन को पत्रकारों की सुरक्षा सुनिश्चित करनी चाहिए।
हमलावरों के खिलाफ सख्त कार्रवाई होनी चाहिए।
पत्रकारों के अधिकारों की रक्षा के लिए कानून और नीतियां बनाई जानी चाहिए।