75 साल पुराने खंडहर भवन में टपकती छत के नीचे पढ़ने को मजबूर छात्राएं — जिम्मेदारों को बड़ी दुर्घटना का इंतजार!

📰 रिपोर्ट: शाहिद खान, प्राइड इंडिया न्यूज़ सीधी / प्राइड कदम हिंदी समाचार पत्र
📍 सिहावल, जिला सीधी (मध्यप्रदेश):
सीधी जिले के सिहावल विकासखंड में शिक्षा की जर्जर तस्वीर सामने आई है, जहां शासकीय कन्या प्राथमिक शाला सिहावल की छात्राएं 75 साल पुराने खंडहर में टपकती छत के नीचे बैठकर पढ़ने को मजबूर हैं। विद्यालय भवन की हालत इतनी खराब है कि कभी भी बड़ी दुर्घटना हो सकती है।
विद्यालय की दीवारों में दरारें हैं, छत टपक रही है और परिसर का वातावरण प्रदूषित हो चुका है। प्रधानाध्यापिका सुभिया सिंह ने बताया कि कई वर्षों से शिकायत के बावजूद सिर्फ आश्वासन मिला। उन्होंने सवाल उठाया कि यदि किसी प्रकार की अप्रिय घटना होती है, तो इसका जिम्मेदार कौन होगा – विभाग या जनप्रतिनिधि?

उन्होंने बताया कि हर बारिश में शिक्षक और बच्चे अपनी जान जोखिम में डालकर पढ़ाई करते हैं। प्रशासन की उदासीनता और नेताओं की संवेदनहीनता से स्कूल की हालत जस की तस बनी हुई है।
📌 विशेष तथ्य:
विद्यालय भवन पर अंकित है 75 वर्ष पुरानी स्थापना तिथि
भवन की छत से लगातार पानी टपकता है
किसी भी समय बड़ा हादसा हो सकता है
शिकायतों के बाद भी अब तक नहीं हुई मरम्मत
🔍 बड़ा सवाल:
क्या प्रशासन और जनप्रतिनिधियों को भी झालावाड़ (राजस्थान) जैसी बड़ी दुर्घटना का इंतजार है, जब जान जाने के बाद ही कोई कदम उठाया जाएगा?
📚 जहां एक ओर सरकारें नई शिक्षा नीति 2020 की बातें करती हैं, वहीं जमीनी हकीकत सरकारी स्कूलों की बदहाली को उजागर करती है।
निचले स्तर से लेकर जिला स्तर तक की लापरवाही और भ्रष्टाचार ने शिक्षा को भी रसातल में पहुंचा दिया है।
🗣 प्रधानाध्यापिका का तंज:
“धन्यवाद उन सभी को, जो स्कूल देखने तो आए पर यहां पढ़ने वाले बच्चों की तकलीफों को नज़रअंदाज कर लौट गए…”
📢 प्रशासन और जनप्रतिनिधियों से सवाल – क्या किसी बड़ी घटना के बाद ही जागेंगे आप?
✒️ प्राइड इंडिया न्यूज़ – सीधी (म.प्र.)
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