सहायिकाओं के भरोसे चल रहा आंगनबाड़ी केंद्र, कार्यकर्ता हफ्ते में एक बार कोरम पूरा कर होती हैं गायब,
सिहावल विकासखंड (सीधी, मध्यप्रदेश) से बच्चों के भविष्य से खिलवाड़ की शर्मनाक तस्वीर,
सीधी जिले के सिहावल विकासखंड में आंगनबाड़ी केंद्रों की बदहाल स्थिति सामने आई है। यहाँ कई केंद्र सिर्फ सहायिकाओं के भरोसे चल रहे हैं, जबकि नियुक्त आंगनबाड़ी कार्यकर्ता हफ्ते में महज़ एक बार औपचारिकता निभाने आती हैं। वे सिर्फ हाजिरी रजिस्टर में हस्ताक्षर करती हैं और फिर पूरे सप्ताह लापता रहती हैं।
छोटे-छोटे बच्चों के लिए यह केंद्र सरकार की प्रमुख योजनाओं में से एक हैं, जहां पोषण, टीकाकरण और प्रारंभिक शिक्षा जैसी ज़रूरी सुविधाएं मिलनी चाहिए। लेकिन हकीकत यह है कि इन केंद्रों में न तो समय पर पोषण आहार वितरित होता है, न पढ़ाई होती है, और न ही स्वास्थ्य संबंधी गतिविधियाँ संचालित हो रही हैं।
ग्रामीणों ने बताया कि बच्चों को कभी-कभार ही पोषण आहार मिलता है, जबकि कुछ केंद्र तो पूरी तरह से बंद रहने की स्थिति में हैं। आंगनबाड़ी सहायिकाएं जितना संभव हो उतना काम करती हैं, लेकिन कार्यकर्ता की गैरमौजूदगी में व्यवस्था पूरी तरह लड़खड़ा जाती है।
ग्रामीणों की प्रशासन से मांग:
आंगनबाड़ी केंद्रों की नियमित जांच की जाए।
लापरवाह कार्यकर्ताओं पर कार्रवाई हो।
बच्चों को सही पोषण और शिक्षा उपलब्ध कराई जाए।
सरकार द्वारा करोड़ों रुपये खर्च कर चलाई जा रही योजनाएं अगर ज़मीन पर इस तरह दम तोड़ती रहीं, तो ‘सुपोषित भारत’ और ‘शिक्षित बचपन’ जैसे सपने सिर्फ कागज़ों तक सीमित रह जाएंगे।