“मोहर्रम की शुरुआत: इमाम हुसैन की कुर्बानी को याद कर रहे मुस्लिम समुदाय”


📌 खबर
आज से इस्लामिक कैलेंडर का पहला महीना मोहर्रम शुरू हो गया है। यह महीना न केवल इस्लाम में विशेष महत्व रखता है, बल्कि यह सबर, बलिदान और सच्चाई के रास्ते पर चलने की प्रेरणा भी देता है।
पैगंबर मोहम्मद साहब के नवासे इमाम हसन और इमाम हुसैन इस्लाम के दो ऐसे महान शख्स हैं, जिन्होंने धर्म की रक्षा के लिए अपने प्राणों की आहुति दे दी। खासकर इमाम हुसैन की करबला की जंग में दी गई शहादत आज भी हर दिल को झकझोर देती है।
मोहर्रम के महीने में मुस्लिम समुदाय इमाम हुसैन और उनके साथियों की कुर्बानी को याद करता है। यह महीना मुस्लिमों के लिए मातम और गम का होता है, जिसमें ताजिया निकाले जाते हैं और मजलिसों के जरिए इमाम हुसैन की शहादत की यादें ताजा की जाती हैं।
यह अवसर हमें बताता है कि अन्याय और अत्याचार के खिलाफ डटकर खड़े होना चाहिए, भले ही उसके लिए कोई भी कीमत चुकानी पड़े। मोहर्रम हमें सच्चाई, इंसाफ और इंसानियत के उस रास्ते पर चलने की प्रेरणा देता है, जिस पर इमाम हुसैन चले थे।