पौराणिक खेल पिट्टू (गिप्पी गेंद) का शासकीय महाविद्यालय सिहावल में आयोजन संपन्न


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भारत के सबसे पौराणिक खेल पिट्टू (गिप्पी गेंद) का शासकीय महाविद्यालय सिहावल में जिला स्तरीय आयोजन संपन्न
सीधी: सिहावल
शासकीय महाविद्यालय सिहावल में भारत के सबसे पौराणिक खेल पिट्टू (गिप्पी गेंद) का जिला स्तरीय आयोजन संपन्न जिले के चार महाविद्यालय की महिला पुरुष टीमों ने खेल में लिया भाग | पुरुष वर्ग से सिहावल एवं सीधी के बीच पहला मैच खेला गया जिसमे सीधी विजेता एवं सिहावल उपविजेता रही | वहीं महिला टीमों की बात की जाए तो शासकीय संजय गांधी महाविद्यालय सीधी एवं शासकीय कन्या महाविद्यालय सीधी के बीच मैच खेला गया जिसमे शासकीय संजय गांधी महाविद्यालय की महिला टीम ने बाजी मारी | महाविद्यालय परिवार की तरफ से प्राचार्य डॉ एल.बी. सिंह द्वारा सभी प्रतिभागियों को पुरस्कृत करते हुए उनके उज्जवल भविष्य की कामना की गई l
प्रतियोगिता के मुख्य अतिथि श्री ऐश्वर्य देव सिंह चंदेल जन भागीदारी समिति अध्यक्ष की गरिमामयी उपस्थिति रही | कार्यक्रम के अध्यक्ष प्राचार्य डॉक्टर एल.बी. सिंह एवं क्रीड़ा प्रभारी डॉक्टर नियाज उद्दीन, क्रीड़ा अधिकारी डॉक्टर रवींद्रनाथ सिंह, श्री अजय कुमार यादव, श्री कैलाश वर्मा एवं डॉक्टर जे. एल. सिंह, डॉक्टर नेहा गुप्ता, डॉक्टर राम निहोर गुप्ता, डॉक्टर कमलेश गुप्ता, एवं ब्लॉक क्रीड़ा अधिकारी श्री बाल गोविंद पटेल जी के अथक प्रयास से कार्यक्रम संपन्न हुआ |
कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रहे महाविद्यालय के प्राचार्य डॉक्टर एल.बी. सिंह द्वारा इस पौराणिक खेल का महत्व बताते हुए कहा गया कि पिट्टू खेलने से कई फ़ायदे होते हैं:
यह खेल एकाग्रता और टीम वर्क में सुधार करता है |
इससे नेत्र-हाथ समन्वय, रणनीतिक योजना, और सामाजिक कौशल में सुधार होता है |
यह खेल बच्चों के लिए अच्छा होता है |
खेल के नियम:-
पिट्ठू एक पारंपरिक भारतीय खेल है | इसे लगोरी के नाम से भी जाना जाता है | यह खेल दो टीमों में खेला जाता है | इसमें सात छोटे-छोटे पत्थरों का इस्तेमाल होता है | पत्थरों को घटते आकार के क्रम में एक-दूसरे के ऊपर रखा जाता है | पिट्टू खेलने का तरीका:
एक चौकोर मैदान में सात छोटे-छोटे पत्थरों को ढेर में रखा जाता है |
पहली टीम के कोई खिलाड़ी टेनिस बॉल से ढेर को मारने की कोशिश करता है |
दूसरी टीम बॉल को पकड़ने की कोशिश करती है |
अगर दूसरी टीम गेंद को ढेर से टकराने के बाद और फिर से उछलने से पहले पकड़ लेती है, तो पहली टीम आउट हो जाती है |
भगवान कृष्ण भी खेलते थे पिट्टू, भागवत पुराण में है उल्लेख
केंद्र ने राज्य सरकार को पिट्टू खेल को लेकर जो गाइडलाइन भेजी है उसमें कहा गया है कि पिट्टू भारत के सबसे पुराने और पारंपरिक खेलों में से एक है। यह प्राचीन और पारंपरिक खेल हजारों सालों से खेला जा रहा है जिसे देश में अलग-अलग नामों से जाना जाता है
भगवान श्रीकृष्ण भी अपने मित्रों के साथ यह खेल खेलते थे, जिसका उल्लेख 5000 साल पहले लिखित हिंदू धार्मिक ग्रंथ भागवत पुराण में मिलता है। शास्त्रों के अनुसार इस खेल की शुरुआत दक्षिण भारत से हुई थी। प्राचीन काल में पिट्ठू का खेल पत्थरों को इकट्ठा करके खेला जाता था जिसमें खिलाड़ियों की संख्या और समय की कोई सीमा नहीं थी और इसका कोई आकार नहीं था। खेल का मैदान और खिलाड़ी अपनी इच्छानुसार कहीं भी खड़े हो सकते हैं। इससे पहले गेम केवल बच्चों के मनोरंजन के लिए खेला गया था।
पहले पत्थर के सात टुकड़े होते थे अब प्लास्टिक का उपयोग
पिट्टू खेल की प्रतियोगिताएं ग्राम स्तर से लेकर राष्ट्रीय स्तर तक आयोजित करने के लिए अब 26 मीटर लंबे और 14 मीटर चौड़े मैदान में खेलने के नार्म्स बनाए गए हैं। इसके तीन जोन और टीम में 10 खिलाड़ी होते हैं जिनमें से 6 खिलाड़ी खेलते हैं और 4 खिलाड़ी स्थानापन्न हैं। पिट्टू मजबूत प्लास्टिक से बना है। खेल को दो भाग में दो टीमों के बीच 10-10 मिनट खेला जाना है। पहले खेल में पत्थर उपयोग होते थे और अब इसकी जगह प्लास्टिक के सात टुकड़े रहते हैं जिसमें सात टुकड़ों से बने पिट्टू सेट को गेंद से गिराकर और उन्हें उसी क्रम में पुनः एकत्रित करके अंक अर्जित करता है। दूसरी टीम इसे रोकने का काम करती है। इसके लिए अंक भी तय कर दिए गए हैं। इस खेल के लिए अलग-अलग एज ग्रुप 10 से 14 साल, 14 से 18 साल और 18 साल से अधिक वाले तय किए गए हैं।
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