सीधी सिहावलः मध्यान्ह भोजन योजना में लगा भ्रष्टाचार का घुन, बच्चों के निवाले में मची लूट जिम्मेदार अधिकारी नहीं दे रहे ध्यान

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प्राइड इंडिया न्यूज संवाददाता सूरज केवट की खास रिपोर्ट

जनपद शिक्षा केंद्र समूह संचालक एवं संस्था प्रमुखों की तिकड़ी लगा रही योजना को चूना….

सीधीः- सीधी जिले में संचालित शासकीय स्कूलों की मध्यान्ह भोजन व्यवस्था बेपटरी में चल रही है। जिले के अधिकांश जनपद शिक्षा केंद्र अंतर्गत संचालित विद्यालयों में बच्चों के लिए बनने वाले मध्यान भोजन में भ्रष्टाचार का घुन लगता नजर आ रहा है। वहीं हम आपको बता दें कि जिले भर में यदि कुछ गिने चुने विद्यालयों को छोड़ दिया जाए तो अधिकतर विद्यालयों में मीनू का पालन नहीं किया जा रहा है।

इधर योजना को साकार रूप देने यानी शासन की योजना अनुसार बच्चों को मध्यान भोजन मिले इसकी जांच का दायित्व सभी बीआरसी को सौपा गया है। लेकिन जांच के नाम पर दौड़ाए जा रहे हैं कागजी घोड़ा के कारण बच्चों के निवाले में खुलकर भ्रष्टाचार किया जा रहा है।

यदि मध्यान भोजन व्यवस्था की जमीनी हकीकत देखी जाए तो आलम कुछ इस कदर है कि सिहावल जनपद शिक्षा केंद्र प्रमुख, स्व सहायता समूह संचालक एवं संस्था प्रमुख के बीच पक रही खिचड़ी के कारण बच्चों को मीनू के अनुसार मध्यान भोजन नहीं मिल पा रहा है।

क्योंकि इन जिम्मेदारों के लिए बच्चों का निवाला कमाई का जरिया बन चुका है और कमाई के जरिए के चक्कर में शासन की योजना में चूना लगाते हुए बच्चों के सेहत से खिलवाड़ किया जा रहा है। जिला मुख्यालय के विकासखंड सिहावल की स्थिति तो और खराब है जहां की मध्यान भोजन व्यवस्था सिर्फ और सिर्फ सिस्टम तक सीमित रह गई है।

आज ग्राम पंचायत बाकी में मध्यान्ह भोजन बनने की शिकायत प्राइड इंडिया न्यूज से की गई थी,

जहां सिहावल प्राइड इंडिया न्यूज के पत्रकार द्वारा तत्काल शासकीय माध्यमिक विद्यालय बाकी पहुंचकर जांच कर भ्रमण किया गया।

जहां तत्काल की जांच में पाया गया था कि यहां भोजन कभी कभी बनता है। यहां सबसे बड़ा सवाल यह उठता है कि आखिर बच्चों के मिड डे मील योजना में कब तक जिम्मेदारों द्वारा पलीता लगाया जाएगा।

वहीं हम आपको यह भी बता दे कि सबसे बड़ा सवाल यह भी उठता है कि आखिर मध्यान भोजन व्यवस्था कब पटरी पर आएगी क्या नौनिहालों के सेहत पर खिलवाड़ करने वाले जिम्मेदारों पर कार्यवाही होगी।

कुछ ऐसे सवाल हैं जिनका उत्तर आना भविष्य के गर्त में है। लेकिन यह सच है कि मध्यान भोजन व्यवस्था में पलीता लगाने वाले सिर्फ स्व. सहायता समूह के संचालक ही नहीं है बल्कि वह भी जिम्मेदार है जिन्हें व्यवस्था की परख एवं निरीक्षण का दायित्व सौंपा गया है।

जिम्मेदारों के कमाई का जरिया बनी मिड डे मील योजनाः

शासकीय विद्यालयों में कक्षा 1 से 8 तक अध्ययन करने वाले सभी विद्यार्थियों के लिए सरकार द्वारा निशुल्क शिक्षा और निशुल्क पाठ्य पुस्तक के साथ-साथ प्रतिदिन विद्यालय में मध्यान भोजन बकायदा मीनू के अनुसार दिए जाने के निर्देश दिए गए हैं परंतु निर्देशों का समूह संचालकों द्वारा ठेंगा दिखाते हुए विद्यार्थियों के निवाला में बृहद कटौती करते हुए कमाई का जरिया मानकर मोटी रकम बटोरने में जुटे हुए हैं।

कुछ इस तरह की स्थिति जनपद सिहावल में है जहां जनपद शिक्षा केंद्र में बैठे जिम्मेदार ईमानदारी का चोला ओढ़कर टेबल के पीछे लिफाफे बाजी करते हुए समूह संचालकों को खुली छूट दे रखे हैं।

ऐसा भी नहीं की मध्यान भोजन में हो रहे भ्रष्टाचार की शिकायतें नहीं आती बल्कि हकीकत यह है कि शिकायतों की जांच सिस्टम तक सीमित रहने के कारण दोषियों पर कार्यवाही नहीं होती।

मिड-डे मील में मीनू का नहीं हो रहा पालन

शासन द्वारा चलाई गई अति जनकल्याणकारी योजना का लाभ विद्यार्थियों को सुचारू रूप से नहीं मिल पा रहा है। शासन द्वारा जारी गाइड लाइन का पालन करने एवं कराने में कोई भी जिम्मेदार गंभीरता नहीं बरत रहे हैं। गौरतलब है कि घर से जब विद्यार्थी विद्यालय में आते हैं तो विद्यालय की दीवार पर लिखा हुआ मीनू को देखकर सोचते होंगे कि आज पुलाव मिलेगा आज पूड़ी मिलेगी। आज खीर मिलेगी। आज हरी सब्जी मिलेगी लेकिन महज चावल दाल और खिचड़ी सब्जी के मीनू मान कर संतुष्टि कर लेते हैं। मीनू विद्यार्थियों के लिए सपनों का मीनू बनकर रह गया है जो कुछ मिला उसी में संतुष्ट होकर वापस घर बले जाते हैं।

जबकि विद्यार्थियों को शासन की योजना अनुसार पौष्टिक आहार मिलना चाहिए। जो जिम्मेदार जांच अधिकारियों की अनदेखी एवं

समूह संचालकों की मनमानी के कारण नहीं मिल पा रहा है जिसका सीधा-सीधा मनों वैज्ञानिक रूप से नन्हें मुझे बच्चों पर पड़ता है। ऐसा भी नहीं की सभी जगह एक जैसे हालात है आज भी जिले के अंदर कई ऐसे स्कूल हैं जहां स्व सहायता समूह संचालकों द्वारा विधिवत मीनू का पालन किया जा रहा है। लेकिन ऐसी व्यवस्था वाले स्कूलों की संख्या बहुत कम है।

जहां जनप्रतिनिधियों के द्वारा समूह का संचालन किया जा रहा है वह तो व्यापक भ्रष्टाचार है जैसे आज हमारा भ्रमण ग्राम पंचायत बाकी के शासकीय माध्यमिक विद्यालय में रहा जहां मेरे द्वारा देखा गया कि घटिया सदी गली आलू की सब्जी के साथ चावल बनाया गया था। वही बच्चों का आरोप था कि सूड़े और एन कीड़ों के साथ थालिया पड़ोसी जाती हैं। जिससे अधिकांश बच्चे भूखे रहना पसंद करते हैं खाना नहीं।

विद्यालय के प्रभारी शिक्षक ने बताया की एक से आठ तक में 216 छात्रों की संख्या है सब्जी और चावल देखकर आप स्वयं अंदाजा लगा सकते हैं कि कितने बच्चे भोजन कर पाएंगे।

विद्यालय प्रभारी शिवप्रसाद पटेल

प्राइड कदम हिंदी समाचार एवं प्राइड इंडिया न्यूज़ (मध्य प्रदेश)।

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