संसद बना अखाड़ा, किसने किसको पछाडा़, विश्व में देश की तस्वीर बिगाडा़

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मजेदार बातें… ✍️

मजेदार बातों की श्रृंखला में मिस्टर बातूनी और उसके लंगोटिया यार मिस्टर बातरोगी के बीच एक जबरदस्त मुद्दा आया।
जिसका विषय था संविधान निर्माता डाॅ भीमराव अंबेडकर को लेकर संसद में हंगामा क्यों ?

इस विषय बिंदु पर मिस्टर बातूनी ने अपना पक्ष रखते हुए कहा कि विश्व का सबसे बड़ा लोकतांत्रिक देश है भारत। हमारे भारत देश की पवित्र आत्मा है संविधान। उसी संविधान के अनुरूप देश को चलाने के लिए सांसद लोग सत्य निष्ठा की शपथ लेते हैं।
इसी बीच मिस्टर बातूनी की बातों को बीच में ही काटकर बातरोगी ने अपने मन में उठे सवाल के बवाल को उगलते हुए कहा –
सवाल – संसद में सांसद लोग संविधान की शपथ देश चलाने के लिए लेते हैं या कुछ और चलाने के लिए ? उनकी सत्य निष्ठा किसमें है ?

* जवाब – मिस्टर बातरोगी आपका सवाल बहुत चिंतनीय है । क्योंकि देश चलाने के लिए जो पवित्र संसद है वह अब अखाड़ा मंच जैसे लग रहा है। यहाँ सांसद अपनी शक्ति और अभिव्यक्ति का प्रयोग क्या चलाने के लिए कर रहे हैं इसे बताने की जरुरत नहीं है। यह अकल्पनीय और अप्रत्याशित घटना है।
बातूनी ने आगे कहा कि डिजिटल इंडिया के जमाने में संसद में घटित घटनाओं की तस्वीर को पूरे विश्व ने देखा और सोचा ये वही भारत है जिसके सांस्कृतिक मूल्यों को स्वामी विवेकानंद ने विश्व मंच पर स्थापित किया था। आज…?

बातरोगी ने जवाब पूरा होने से पहले ही एक और सवाल पूछा ।
* सवाल – इस पर अंकुश कौन लगाएगा ?
* जवाब – इस पर अंकुश लगाने की शक्ति सिर्फ जनता के पास है। क्योंकि सांसद चुनने का अधिकार संविधान ने जनता को सौंप दिया है। इसलिए जनता चाहे तो आने वाले समय में संसद को अखाड़ा मंच बनने से रोक सकती है। और देश के विकास के लिए पक्ष और विपक्ष को निष्पक्ष निर्णय हेतु प्रेरित कर सकती है । जिससे बाबा साहेब अंबेडकर के सपनों का भारत साकार हो सकेगा।
मिस्टर बातूनी के बाबा साहेब अंबेडकर के संबंध में जवाब को सुनकर बातरोगी ने एक और सवाल पूछा.
* सवाल – जिसने देश के लिए संविधान बनाया। देश ने ऐसे महान व्यक्ति को राष्ट्रपति या प्रधानमंत्री क्यों नहीं बनाया ?
इस सवाल का जवाब देते हुए बातूनी ने कहा – मिस्टर बातरोगी यही सवाल आज भारत की आम जनता के जुबान पर भी है।मुझे लगता है कि संविधान निर्माता बाबा साहेब अंबेडकर को उस समय यदि देश के राष्ट्रपति या प्रधानमंत्री बनाए जाते तो भारत की दशा और दिशा आज कुछ अलग होती। लेकिन…

बातूनी ने आगे कहा कि इस अनुत्तरित प्रश्न को आने वाली पीढी भी उठा सकती है। इसलिए मेरा मानना है कि सभी दल एक दूसरे पर आरोप प्रत्यारोप लगाना छोड़कर शांति पूर्वक चिंतन मनन करेंगे तो समस्या का समाधान जरूर होगा ।
बातूनी के इस बात का समर्थन करते हुए बातरोगी ने कहा कि बुरा न माने तो मेरे मन में अंतिम सवाल जो बवाल मचा रहा है। आपकी इजाजत हो तो पूछूं।
इस बार बातूनी मुस्कराते हुए कहा नेकी और पूच पूच, जो कुछ पूछना है जल्दी पूछ, तब बातरोगी ने एक मजेदार सवाल किया –
ऐसा कौन सा विधेयक है जिसे पक्ष और विपक्ष निष्पक्ष होकर पास करते हैं ? जिसमें भाई चारे की भावना झलकती है ।
मिस्टर बातरोगी के मजेदार सवाल का जवाब भी बातूनी ने मजेदार ढंग से देते हुए कहा कि –
संसद में जब भी सांसदों के वेतन भत्ता बढ़ाने संबंधी विधेयक लाया जाता है। उसे पक्ष और विपक्ष निष्पक्ष रुप से पास करते हैं। यही ऐसा विधेयक है जो सबको भाईचारे की भावना से बाँध देता है।
दोनों लंगोटिया यार आपस में ठहाका लगाते हुए कहते हैं भाई साहब, जब आप लोग वेतन भत्ता के लिए एकजुट हो सकते हो, तो वेतन देने वाले उस वतन के विकास के लिए एकजुट क्यों नहीं ..?

डाॅ मुन्नालाल देवदास ✍️
( राष्ट्रपति / राज्यपाल पुरस्कृत)
नगर पंचायत कोपरा, राजिम, जिला – गरियाबंद छत्तीसगढ़ Ⓜ️99936 – 44766

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