पनिहा गांव के लोगों की बिजली के इंतजार में ढल रही जवानी, खा गये भ्रष्ट्र अधिकारी


रिपोर्ट- नेशनल ब्यूरो चीफ राकेश शर्मा
सीधी
मध्य प्रदेश के सीधी जिले में बहरी तहसील अंतर्गत ग्राम पंचायत क्षेत्र शरदा का एक गांव पनिहा जहां के लोग जब अंधेरे से खूब ऊब जाते हैं तब बिजली देखने के लिए समीपी दूसरे गांव चले जाते हैं! यह सुनकर आपको निश्चित रूप से आश्चर्य हो रहा होगा ठीक इसी तरह मुझे भी हुआ था! खबर मिलने पर प्राइड इंडिया न्यूज़ एवं वनांचल समाचार पत्र संवाददाता द्वारा जब इस गांव के हालात से रूबरू हुआ गया तब वह अपने आप को खुद अंधेरे में महसूस करने लगा! एक तरफ तो देश के साथ-साथ प्रदेश सहित सीधी जिले में बिजली की चकाचौंध कर देने वाली रोशनी सहित अनेकों सुविधायें उपलब्ध हैं, लेकिन सीधी जिले के पनिहा गांव में आज भी बिजली सहित अन्य मूलभूत सुविधाओं का भारी अकाल पड़ा हुआ है! यह कैसी आजादी है…? विकास यात्रा की विजय गाथा का ढोल पीटने वाले नेता शायद इस गांव को जानते भी नहीं होंगे !यह पनिहा गांव आखिर किसकी मेहरबानी से आदम काल का जीवन जी रहा है।
संवाददाता से आंखों में आंसू तथा पीड़ा संजोए हुए सबालों का बस्ता खोलते हुए ग्रामीणों ने बताया कि यहां जनप्रतिनिधियों का कोई व्यक्ति चुनाव के समय बोट बटोरने के लिए एक बार तो आता जरूर है, बड़े-बड़े वायदे करके जाता जरूर है, फिर ना जाने कौन सा अंधेरा, कौन सा काल उसे लील जाता है जो फिर से हमारी सुधि लेने वापस नहीं आता! इसी गांव के निवासी अनिल कुमार सिंह उर्फ भोले का कहना है कि इस गांव के लिए बिजली एक बार स्वीकृत हुई थी लेकिन उस समय वृत्त बहरी के घूंसखोर एवं भ्रष्ट अधिकारियों द्वारा रिश्वत लेकर बिजली दूसरे गांव में लगा दी गई थी! जिसकी शिकायत भी इनके द्वारा सभी संबंधित सक्षम अधिकारियों से की गई थी, लेकिन सब के सब ने अपनी आंखें और कान बंद कर लंबे बनवास पर चले गए!
संवाददाता द्वारा सवाल किया गया कि आप उजाले का मतलब समझते हैं तो ग्रामीणों का कहना था कि हां हमारे लिए उजाले का मतलब दोपहर होता है। इस आजादी के अमृत काल में पनिहा जैसे छोटे गांव में बिजली क्यों नहीं..?यह सवाल नेताओं, जनप्रतिनिधियों और शासन प्रशासन के लिए करारा तमाचा है! इस गांव की भारी समस्या बिजली का ना होना ही है! जिसके आभाव में यहां के लोग विकास से बेहद पीछे हैं! यहां के लोग ना तो देश दुनिया के दूसरे क्षेत्रों से जुड़ पा रहे हैं और ना ही आधुनिक तरीके से कृषि कार्य कर पा रहे हैं! चिमनी, लालटेन और दिए की रोशनी में ही जीवन गुजारते चले जा रहे हैं! लोगों का कहना है कि इन्हें आने वाली पीढ़ियों की फिक्र खूब सताती है! निश्चित ही गांव की दुर्दशा देखकर आदमी असहज हो जाता है! ऐसे गांव में विकास की गाथा का गाया जाना बेहद पीड़ा दायक है! चिमनी, लालटेन और दिए से रोशन होते पनिहा गाँव में बिजली के इंतजार में ग्रामीणों की ढल रही है जवानी!