क्षेत्रीय संस्कृति का प्रतीक मड़ई

शहपुरा से मनोज कुमार यादव
डिंडौरी, 11 नवम्बर 2024
मध्यप्रदेश के जनजातीय क्षेत्रों में लगने वाला एक प्रमुख मेला है। मड़ई मेला डिंडौरी जिले में आयोजित होने वाला प्रमुख मेला है, जो प्रतिवर्ष देवउठनी एकादशी से प्रारंभ होकर एक माह से भी अधिक समय तक गाँव-गाँव में आयोजित किया जाता है। मडई मेला डिंडौरी जिले की आदिवासी संस्कृति और विरासत का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है, जो लोगों को एकत्रित होने और आंनद लेने का अवसर प्रदान करता है। मेला विभिन्न सांस्कृतिक धार्मिक, और मनोरंजनकारी गतिविधियों को अपने में समाहित करता है।
मड़ई जनजातियों का उल्लास पर्व है इसे लघु मेला भी कहा जाता है। मड़ई मेले के आयोजन के लिए कोई विशेष मुहूर्त की आवश्यकता नहीं होती है। इनके आयोजन के लिए तिथियां ग्रामों के अनुसार तिथि निर्धारित होती है, साथ ही विशेष रूप से भी आयोजन किया जाता है।मड़ई प्रमुख उद्देश्य ग्राम्य देवता की आराधना करना है। मड़ई ग्रामीण जनों में फसल आने की प्रसन्नता, सुखद जीवन के संदेश को व्यक्त कर आदिवासी संस्कृति का प्रदर्शन करता है। मान्यतानुसार क्षेत्रीय देवी देवताओं सहित भगवान शिव और माता काली की आराधना के लिए मेला का आयोजन किया जाता है। यह सामाजिक एकता और सौहाद्रता का प्रतीक है, जो एकजुटता के महत्व को प्रदर्शित करता है।
मड़ई आयोजन की सूचना पूर्व से ही निकटतम क्षेत्रों में ’रेरी’ के माध्यम से दी जाती है। मड़ई बाँधने वाले ग्वाल तथा पुजारी जनजातियों के घर-घर जाकर वाद्ययंत्र बजाते हुए पारंपारिक नृत्य करते है।
मड़ई आयोजन के दिन बांस, लकड़ी गंदीला, मोरपंख, सुपाडी, त्रिशूल, लाल रंग की पताका आदि के द्वारा मड़ई का स्वरूप देकर मड़ई बांधा जाता है। जिसको पंडा अपने समूह में साथ रखकर आदिशक्ति की आराधना करते है। मड़ई को लेकर समूह ग्राम की परिक्रमा करते हैं और निश्चित स्थान पर स्थापना करते हैं। मड़ई का दर्शन कर सभी संबंधीजन एक-दूसरे का कुशलक्षेम पूछते हुए, मेले का आनंद उठाते है, इस दौरान आदिवासी नृत्य संगीत समारोह, पारंपरिक खेल और गतिविधियों हस्तशिल्प व स्थानीय उत्पादों की प्रदर्शन, क्षेत्रीय व्यंजन, आकर्षक झूले लोगों का मनमोह लेते हैं।