बेतिया राज के अंतिम महाराज और दो रानियों की कहानी, एक- एक इंच जमीन और महल पर केके पाठक की नजर

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*प्रवीण कुमार पाण्डेय, अरेराज, पूर्वी चम्पारण।* मुगल काल के बाद के चंपारण का इतिहास बेतिया राज के उदय और अस्त से जुड़ा है। बादशाह शाहजहां के समय उज्जैन सिंह और गज सिंह ने बेतिया राज की नींव डाली। मुगलों के कमजोर होने पर बेतिया राज महत्वपूर्ण बन गया और शानो-शौकत के लिए अच्छी ख्याति अर्जित की। 1763 ईस्वी में यहां के राजा धुरुम सिंह के समय बेतिया राज अंग्रेजों के अधीन काम करने लगा। इसके अंतिम राजा हरेंद्र किशोर सिंह का कोई पुत्र न होने से 1897 में इसका नियंत्रण न्यायिक संरक्षण में चलने लगा जो अब तक कायम है।

*अंतिम राजा की कहानी*

अंतिम राजा हरेंद्र किशोर सिंह की दूसरी रानी जानकी कुंवर के अनुरोध पर 1910 में बेतिया महल की मरम्मत करायी गयी थी। बेतिया राज की शान का प्रतीक यह महल आज यह शहर के मध्य में इसके गौरव का प्रतीक बनकर खड़ा है। बेतिया राज के महल के साथ सैकड़ों एकड़ में फैली जमीन भी है। उस जमीन को भी सरकार मुक्त कराने के प्रयास में लगी हुई है। ध्यान रहे कि बेतिया राज के अंतिम राजा हरेंद्र किशोर सिंह की 26 मार्च, 1893 को मृत्यु हो गई थी। उनका कोई उत्तराधिकारी नहीं था। राजा हरेंद्र किशोर सिंह ने दो शादी की थी। महारानी शिव रत्ना कुंवर और महारानी जानकी कुंवर उनकी पत्नी थीं। राजा हरेंद्र किशोर सिंह की पहली पत्नी की मृत्यु 1896 में हो गई।

*प्रबंधन में नाकाम थी रानी*

राजघराने में ये बात प्रसिद्ध थी कि महारानी जानकी कुंवर राजघराने की संपत्ति का प्रबंधन करने और उसकी देखरेख में सक्षम नहीं थी। इसलिए इसका प्रबंधन कोर्ट ऑफ वार्ड्स को दे दिया गया। महारानी जानकी कुंवर की मृत्यु 1954 में हो गई। बेतिया राज की कीमती जमीन पूर्वी और पश्चिमी चंपारण जिलों के अलावा बेतिया राज की जमीन बिहार के गोपालगंज, सिवान, पटना और सारण जिलों में फैली है। दोनों रानियों की मृत्यु के बाद बेतिया राज का अस्तित्व बस संपत्ति में सिमट कर रह गया। यूपी- बिहार तक हजारों एकड़ में फैली जमीन और सैकड़ों एकड़ में फैले महल आधिकारिक तौर पर सरकार के कब्जे में आ गए। फिलहाल, हजारों एकड़ जमीन अवैध कब्जे में है।

*हजारों एकड़ में फैली जमीन*

बेतिया राज की हजारों एकड़ जमीन और संपत्ति का प्रबंधन बिहार सरकार के राजस्व बोर्ड यानी ‘कोर्ट ऑफ वार्ड्स’ की ओर से किया जाता है। गत वर्ष राजस्व बोर्ड के जारी आंकड़े बताते हैं कि बेतिया राज की कुल भूमि में से लगभग 66 फीसदी यानी 6,505 एकड़ को अतिक्रमित किया गया है। वहीं, पूर्वी चंपारण में 3 हजार 219 एकड़ और लगभग 60 फीसदी भूमि अतिक्रमण का शिकार है। राजस्व बोर्ड के अध्यक्ष सह सदस्य केके पाठक ने पश्चिम चंपारण के एक भूखंड से जुड़े मामले में अपना आदेश अक्टूबर महीने में दिया था। जिसमें उन्होंने कहा था कि राज्य सरकार बेतिया राज की संपूर्ण संपत्ति अपने कब्जे में लेने पर विचार कर रही है।

*बेतिया राज की जमीन*

केके पाठक ने ये भी इशारा किया था कि इससे जुड़ा एक विधेयक दिसंबर 2024, विधानमंडल के सत्र में पेश किया जाएगा। केके पाठक की ओर से साफ किया गया है कि बेतिया राज की पूरी भूमि राजस्व और भूमि सुधार विभाग के पास आएगी। बिहार सरकार अतिक्रमण हटाने की प्रक्रिया शुरू कर चुकी है। इसे और तेज किया जाएगा। ‘कोर्ट ऑफ वार्ड्स’ के मुताबिक बेतिया राज की जमीन का मूल्य 7,957.38 करोड़ रुपये है। बेतिया राज की 15, 358. 60 एक जमीन में से 15, 215. 33 एकड़ जमीन बिहार में और 143.26 एकड़ यूपी में है। विभागीय जानकारी के मुताबिक बेतिया राज के एक बड़े हिस्से पर साजिश के तहत अतिक्रमण किया गया है।

*केके पाठक को जिम्मेदारी*

बिहार में जमीन सर्वे का काम जारी है। राज्य सरकार ने अधिकारियों को बेतिया राज की भूमि को चिन्हित कर उसे अतिक्रमण मुक्त करने का आदेश दिया है। राज्य सरकार उसके लिए विशेष भूमि सर्वे कर रही है। ध्यान रहे कि बिहार में जमीन सर्वे के पीछे राज्य सरकार का एक तर्क ये भी है कि बिहार सरकार की जमीन की वास्तविक स्थिति का पता लगाया जाए। इसी क्रम में बिहार सरकार अरबों की जमीन को अपने कब्जे में करना चाहती है। राज्य के तेज तर्रार आईएएस अधिकारी केके पाठक को इसकी जिम्मेदारी दे दी गई है। बेतिया राज की भूमि को दबाकर बैठने वालों की खैर नहीं है। कहा जा रहा है कि केके पाठक की बेतिया राज वाली एक-एक इंच जमीन पर नजर है। सरकार बहुत जल्द उसे मुक्त कराएगी।

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