अंतर्राष्ट्रीय गीतकार डाॅ मुन्ना लाल देवदास की नई किताब ‘ शब्दांजलि पूर्वजों को ‘

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गीता प्रकाशन से प्रकाशित यह नई किताब है शब्दांजलि पूर्वजों को। इसके संपादक हैं राष्ट्रपति पुरस्कृत पूर्व प्रधानाध्यापक , साहित्यकार एवं अंतर्राष्ट्रीय गीतकार डाॅ मुन्ना लाल देवदास।

इस नई किताब के संदर्भ में हमारे संवाददाता ने बताया कि शब्दों में असीम शक्ति है। शब्दों के माध्यम से ही हम अपनी भावनाओं विचारों और संवेदनाओं को एक दूसरे के साथ आदान प्रदान करते हैं। हमारे भारतीय संविधान का निर्माण भी शब्दों के माध्यम से हुआ है। सारे संसार का कार्य व्यवहार भी शब्द शक्ति पर आधारित है।

इसी तरह देश की आजादी के लिए पूर्वजों ने जो कुर्बानी दी है उसे अक्षुण्ण बनाये रखने के लिए , उनके योगदान को आने वाली पीढ़ी तक प्रभावपूर्ण ढंग से पहुँचाने के लिए शब्दांजलि सशक्त माध्यम है। हकीकत में शब्दांजलि पूर्वजों के कार्यों के प्रति कृतज्ञता के भाव हैं। कृतज्ञता मानवीय गुणों का सबसे बड़ा श्रृंगार है। कृतज्ञता सफलता का द्वार है। इसलिए पूर्वजों को सम्मान देने हेतु हमारी भारतीय परंपरा में 15 दिनों का विशेष पितर पक्ष मनाया जाता है।

डाॅ देवदास ने इस बुक में राम चरित मानस में वर्णित पितर पक्ष के विभिन्न प्रसंगों का वर्णन किया है। जो हमारी सभ्यता संस्कृति और संस्कार के प्रतीक है। इस किताब में विभिन्न प्रांतों के रचनाकारों की रचनाओं को शामिल किया गया है। जिससे पूर्वजों के योगदान को हर प्रांतवासी तक पहुंचाया जा सके। इसके लिए विशेष प्रयास गीता प्रकाशन के डाॅ नितीन टंडन और पूरी टीम का है। डाॅ मुन्ना लाल देवदास के संपादन में यह किताब – शब्दांजलि पूर्वजों को अपने उद्देश्य में सफल होगा।इसे जनता का प्यार और आशीर्वाद सदैव मिलता रहेगा। इस पुस्तक के प्रकाशन पर अनेक कवि एवं साहित्यकारों ने डाॅ देवदास को बधाई एवं शुभकामनाएं दी है।

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