नाबालिक लड़कियों में लगाए पूर्व सरपंच पर छेड़छाड़ के आरोप

पुलिस की लापरवाही के कारण कहीं ना हो जाए हमारा मध्य प्रदेश शर्मसार
एमपी की अजब पुलिस के गजब कारनामे
इंट्रो। पुलिस बच्चियों की सुरक्षा के लिए, मैं हूं अभिमन्यु, जैसे चाहे जितने अभियान चला ले, सरकार लाडली लक्ष्मी और लाडली बहनों की हितेशी होने के भले तमाम दावे करे लेकिन धरातल पर बच्चियां सुरक्षित नहीं है। दिनों दिन मध्य प्रदेश में बच्चियों के साथ होने वाले अपराधों का ग्राफ बढ़ता जा रहा है। थाने में नाबालिग बच्चियों द्वारा एफआईआर के लिए गुहार लगाई जा रही है। लेकिन मजाल क्या इस गूंगे बहरे सिस्टम को इनकी आवाज सुनाई दे। खाकी पहने हुए सरदार खाकी के घमंड में इतने चूर हो गए हैं कि इनको आमजन की सुरक्षा से कोई वास्ता नहीं है। पुलिस की शह पर ही अपराधियों के हौसले बुलंद है। खाकी वाले आखिर में वह भूल जाते हैं कि उनको यह खाकी जनता की सुरक्षा के लिए ही मिली है।सरकार द्वारा मोटी रकम पाने वाले दरोगा अपने आप को जनता का नौकर नही थानों का मालिक समझने लगे है।
लटेरी। दिनों दिन मध्य प्रदेश बच्चियों के लिए असुरक्षित राज्य साबित होता जा रहा है। बच्चियों के साथ होने वाली घटनाओं में निरंतर वृद्धि हो रही है।अगर हम बात करें एमपी पुलिस की तो मोहन सरकार का नियंत्रण पुलिस पर कम होता जा रहा है। प्रतिदिन कोई ना कोई बच्ची किसी दरिंदे की दरिंदगी का शिकार होती जा रही है। समाज में अपराधी बढ़ने का मुख्य कारण है पुलिस द्वारा अपराधियों का संरक्षण,या समय से पहले पुलिस द्वारा अपराधियों पर कार्यवाही न करना। इसी तरह का एक मामला मुरवास थाने का है, यहां पर प्रेम सिंह पुत्र चिरोंजीलाल धाकड़ द्वारा थाना प्रभारी मुरवास में अपनी बच्चियों के साथ आकर दिनांक 11/10/2024 थाना प्रभारी को एक लिखित आवेदन दिया गया कि मेरे ही ग्राम के महेश धाकड़ विनोद धाकड़ गोलू धाकड़ नीलेश धाकड़ मेरे खेत पर ट्रैक्टर और जीप लेकर आए, ये लोग जबरन मेरे खेत में रखी फसल को ट्राली में भरने लगे, जब मेरे परिवार द्वारा फसल को भरने का विरोध किया तो इन लोगों ने मेरे एवं मेरे परिवार के साथ मारपीट की। महेश और विनोद के द्वारा मेरी बच्चियों के साथ छेड़ छाड़ की गई, महेश और विनोद ने गलत नीयत से मेरी बच्चियों को टच भी किया गया।
– आवेदन देने पर भी आज तक नही हुई एफआईआर
प्रेमसिंह धाकड़ ने बताया कि में दो दिन पहले ही आवेदन थाना प्रभारी मुरवास और एसडीओपी कार्यालय लटेरी को दे चुका हूं, लेकिन मेरी आज तक थाना प्रभारी मुरवास द्वारा एफआईआर नहीं लिखी है, जांच के नाम पर मुझे और मेरी बच्चियों को सुबह से शाम तक थाने में बैठकर रखा जाता है। प्रेम सिंह के साथ आई दोनो नाबालिग बच्चियों ने बताया कि हमारे साथ महेश और विनोद के द्वारा छेड़छाड़ की गई है। हमारे द्वारा थाना प्रभारी को आवेदन दिया गया है लेकिन थाना प्रभारी द्वारा एफआईआर नहीं की जा रही है। घटना के तीन दिन बीत चुके हैं हम लोग रोज परेशान हो रहे हैं हमारी कहीं भी सुनवाई नहीं हो रही है।
– थाना प्रभारी का ढुल मुल रवैया संदेह के घेरे में
महिलाओं एवं बच्चियों के अपराधों के बारे में राज्य सरकार के भी स्पष्ट निर्देश है कि तत्काल एफआईआर की जाए। लेकिन घटना के तीन दिन बीत जाने के बाद भी मुरवास थाना प्रभारी द्वारा एफआईआर दर्ज नही की गई है, सिर्फ जांच का बहाना बनाकर गुमराह किया जा रहा है। मुरवास थाना प्रभारी द्वारा जान बूझकर एफआईआर नहीं की जा रही है या पूर्व सरपंच महेश धाकड़ के दवाब में आकर कार्यवाही नहीं की जा रही है। थाना प्रभारी के कार्य प्रणाली को देखकर ऐसा प्रतीत होता है कि अपराधियों को बचाने में लगे हुए हैं, क्योंकि प्रेम सिंह धाकड़ द्वारा चार लोगों के नाम से आवेदन दिया है जबकि थाना प्रभारी द्वारा दो लोगों पर सामान्य धाराओं एफआईआर की गई है।
– एमपी का एक थाना ऐसा भी जहां पर नहीं होती छुट भैया नेताओं की एफआईआर
जी हां हम बात कर रहे हैं विदिशा जिले के मुरवास थाने की यहां पर थाना प्रभारी स्वयं मजिस्ट्रेट का कार्य करते हैं ऐसा हम इसलिए कह रहे हैं की क्षेत्र में कहीं भी कोई घटना घटित हो जाए और अगर घटना को अंजाम किसी छुट भईया नेता द्वारा दिया गया हो तो उस छुट भईया का नाम फरियादी द्वारा बताने के बाद भी एफआईआर में नहीं लिखा जायेगा।आप कुछ भी बोलो कैसा भी आवेदन दो लेकिन एफआईआर होगी तो थाना प्रभारी की ही मर्जी से। पहला मामला बरखेड़ा घोसी का ही है जिसमे पिता और बेटी द्वारा नाम दर्ज आवेदन दिया गया, लेकिन थाना प्रभारी द्वारा आवेदन में दिए गए दो नामों को छोड़कर एफआईआर दर्ज कर ली, और दूसरा मामला भी बरखेड़ा घोसी का ही है यहां पर झांकियों के निकालने में दो गुटों में लड़ाई हो गई, इस मामले में भी थाना प्रभारी द्वारा जो नाम सामने बाली पार्टी ने बताए थे उनमें से एक छुट भइया नेता को छोड़कर एफआईआर दर्ज कर ली।
– चार माह से गायब है किशोरी पुलिस लगा नही पा रही सुराग
यह मामला भी ग्राम बरखेड़ा घोषी का है। इस ग्राम की एक नाबालिक लड़की को नटेरन ग्राम का एक गोलू नामक लड़का तीन माह पहले अपहरण करके ले गया है। मुरवास पुलिस द्वारा लड़की के पिता को सिर्फ आश्वासन मिल रहा है, तीन माह बीत जाने के बाद भी आज तक पुलिस खाली हाथ बैठी है। अपनी नाबालिग बेटी की तलाश में थाने से लेकर एसपी और भोपाल में बैठे सूबे के आला अधिकारियों से अपनी नाबालिग बेटी को खोज लाने की गुहार लगा चुका है, लेकिन इस गूंगे बहरे सिस्टम में उसकी आवाज सुनने बाला कोई नहीं है।आखिर सवाल उठता है कि पुलिस कार्यवाही क्यों नही कर रही है, लड़की को खोजने में क्यों पुलिस असफल हो रही है या फिर पुलिस किसी के दवाब के कारण लड़की को नहीं खोज रही है या फिर कारण और ही कुछ है।
विदिशा से ब्यूरो चीफ मिट्ठू लाल की रिपोर्ट