विदिशा जिला मुख्यालय से लगभग 150 किलोमीटर दूर लटेरी तहसील के ग्राम कालादेव में अनोखा दशहरा मनाया गया।

0 232

शनिवार को दशहरे पर पत्थर मार युद्ध का आयोजन किया गया। एक और राम सेना के सैनिक बीच मैदान में ध्वज की परिक्रमा लगाने दौड़कर जा रहे थे तो दूसरी तरफ रावण दल के सैनिक गोफन से पत्थर बरसा रहे थे। करीब दो घंटे तक यह नजारा चला। खासबात ये रही कि अचूक निशाने के बाद भी रावण दल के सैनिकों का पत्थर राम सैनिकों को नहीं लगा। गांव के रामेश्वर शर्मा ने बताया कि सदियों पहले मिट्टी की रावण प्रतिमा बनाकर पत्थर मार युद्ध का आयोजन किया जाता था। साल 1993-94 में लक्ष्मीकांत शर्मा जब पहली बार विधानसभा चुनाव जीते तो उन्होंने रावण की प्रतिमा बनवाई थी। तभी से दशहरे के अवसर पर यहां बड़े स्तर पर आयोजन किया जाने लगा।

राम सेना में स्थानीय और रावण सेना में भील, बंजारे होते हैं शामिल-

राम सेना में स्थानीय ग्राम कालादेव के नागरिक शामिल हुए और वहीं रावण सेना में दूसरे गांव के भील, बंजारे समाज के लोग सम्मिलित होते हैं। ऐसा माना जाता है कि यदि धोखे से कोई बाहर का व्यक्ति राम दल में शामिल होकर ध्वज की परिक्रमा लगाने जाता है तो उसको पत्थर लगता है।

एक पत्थर का वजन होता है 300 ग्राम तक, निशाना भी अचूक-
रावण दल में शामिल देवीपुरा के मांगीलाल भील, जरसेना के बद्री भील, नारायणपुर के सौदान सिंह आदि ने बताया कि हम लोग लगभग एक सप्ताह से इन पत्थरों को चुन-चुन कर तरासते हैं। गोफन से पत्थर फेंकने के लिए पहले चिकना करते हैं। हम गोफन से इन पत्थरों को लगभग 200 मीटर तक फेंक सकते हैं। इस बार हमारे साथ 29 लोग रावण दल में शामिल हुए। जरसेना के सीताराम भील ने बताया कि हमारा निशान अचूक रहता है। हम पेड़ पर बैठी हुई चिड़िया को भी एक बार में मार कर नीचे गिरा सकते हैं लेकिन राम सेना सैनिकों को कोई पत्थर नहीं लगता। जब राम सेना में बाहर का व्यक्ति बाहर का सम्मिलित होता है तो उसको जरूर पत्थर लग जाता है।

पेड़ों और मकान की छतों पर चढ़कर देखा नजारा
पत्थर मार युद्ध का नजारा देखने के लिए जन सैलाब उमड़ पड़ा। गुना, राजगढ़, विदिशा के जिलों के हजारों लोग पहुंचे। पत्थर मार युद्ध का नजारा लोगों ने घर की छतों, पेड़ों और टीनशेड पर पर चढ़कर देखा।

विदिशा से ब्यूरो चीफ मिट्ठू लाल की रिपोर्ट

Web TV

अगली ख़बर

Leave a comment