ठगी गई जनता, ठगा जा रहा किसान, झूंठे वादे करके कहां गए चौहान

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सीधी से जिला क्राइम रिपोर्टर शाहिद खान
कांग्रेस ने 32 साल के शासन में 10 मुख्यमंत्री दिए, जिन्होंने 19 बार पद संभाला, सिर्फ दो ही 5 साल का टर्म पूरा कर सके
भाजपा ने 5 बार सरकार बनाई, शिवराज सिंह ने बनाया सबसे लंबी पारी का रिकॉर्ड
भोपाल: 1956 में मध्य प्रदेश बना। इसके पहले सीएम बने रविशंकर शुक्ल। तब से अब तक राज्य में 14 चुनाव हो चुके हैं। इसमें 32 साल कांग्रेस सत्ता में रही। उसके कुल 10 नेता 19 बार सीएम बने। भाजपा को पहली बार 1977 में इमरजेंसी के बाद और फिर 1990 में सत्ता मिली। हालांकि सरकार दोनों ही बार टर्म नहीं पूरा कर पाई। 1993 से 2003 तक कांग्रेस की दिग्विजय सरकार रही। 2003 से भाजपा सत्ता में है। सिर्फ, दिग्विजय और शिवराज ही टर्म पूरा कर सके।
1956: रविशंकर शुक्ल पहले सीएम बने
मध्यप्रदेश के पहले मुख्यमंत्री रविशंकर शुक्ल थे। महज दो माह में ही उनका निधन हो गया। फिर भगवंतराव मंडलोई 21 दिन तक कार्यवाहक सीएम रहे, फिर कैलाशनाथ काटजू को सीएम बनाया गया। उनके नेतृत्व में कांग्रेस 1957 का चुनाव जीती और उन्होंने दूसरी विधानसभा का टर्म पूरा किया।
राजमाता विजयाराजे सिंधिया की शह पर गोविंद नारायण सिंह ने 36 कांग्रेसी विधायकों को तोड़कर संयुक्त विधायक दल (संविद) की सरकार बनाई, जो 19 महीने चली। गोविंद नारायण सीएम पद से इस्तीफा देकर कांग्रेस में आ गए। 1969 में कांग्रेस ने फिर सरकार बनाई। तीसरी विधानसभा के बाकी समय में 3 सीएम बदले।
1972 में प्रकाशचंद्र सेठी को दिल्ली से भेजा गया। चार साल बाद उनकी जगह श्यामाचरण शुक्ल को सीएम बनाया गया। आपातकाल के बाद जनता पार्टी की सरकार बनी। कैलाशचंद्र जोशी सीएम बने। वो करीब सात महीने सीएम रहे, फिर वीरेंद्र कुमार सखलेचा के बाद सुंदरलाल पटवा सीएम बने।
1980 में कांग्रेस ने वापसी की। आठवीं विधानसभा में अर्जुन सिंह, मोतीलाल वोरा, श्यामाचरण शुक्ल सीएम रहे। 1990 में भाजपा ने वापसी की। सुंदरलाल पटवा सीएम बने। अयोध्या में बाबरी विध्वंस की घटना के बाद केंद्र ने पटवा सरकार बर्खास्त कर दी। 1993 में दिग्विजय सिंह सीएम बने और उन्होंने दो कार्यकाल पूरे किए।
2003 में भाजपा की उमा भारती ने दिग्विजय के चुनावी मैनेजमेंट को चित कर दिया और कांग्रेस 38 सीटों पर सिमट गई। तब से भाजपा सत्ता में है। इस दौरान भाजपा में उमा भारती, बाबूलाल गौर और शिवराज सिंह सीएम रहे। शिवराज मध्य प्रदेश में कुल 15 साल 10 महीने 5 दिन तक सीएम रहे जो एक रिकॉर्ड है | सीएम शिवराज सिंह के कार्यकाल के अंतिम दौर मे परिवर्तन की भयंकर लहर उठी किंतु शिवराज सिंह चौहान ने एम पी में लाडली बहना योजना चला दी और प्रदेश की राजनीति महिला केंद्रित होकर बीजेपी कांग्रेस में कांटे की टक्कर मे पहुंच गई | परिणाम से पूर्व शिवराज सिंह ने अपने उद्बोधन में कहा कि यहां कोई कांटे की टक्कर नहीं है सारे कांटे लाडली बहनों ने निकाल दिये हैं और परिणाम भी वही निकाला विधानसभा चुनाव 2023 में बीजेपी ने 230 में से 163 सिटें हासिल कर पुनः पांचवीं बार शिवराज के नाम पर कांग्रेस के कमलनाथ को बड़ा तगड़ा झटका दिया | किंतु महिला केंद्रित राजनीति के चक्कर में जनता एक बार फिर से ठगी का शिकार हो गई और अब आगे डॉ. मोहन यादव के हाथ मध्य प्रदेश की कमान थमाते हुए केंद्र की भाजपा सरकार ने एक बार फिर चुनावी जुमले फेक केंद्र की राजनीति में इतिहास रचने की कोशिश की है |
जाहिर सी बात है कि,जब सरकार ने योजनाएं जनता के लिए लागू की हैं तो फिर पोर्टल भी लगातार चालू रहने चाहिएं योजनाओं के लिए पंजीयन ऑनलाइन कहीं से भी किए जाने चाहिए अथवा पंचायत स्तर पर आवेदन लगातार जमा होने चाहिए सिर्फ एक ही दिन कैंप में बुलाकर विकसित भारत संकल्प यात्राओं के बहाने जनता को बुलाकर बरगलाया क्यों जाता है | पिछले 20 वर्षों से मध्य प्रदेश में बीजेपी की सरकार मे जब जनता खुशहाल है तो योजनाओं से वंचित कैसे रह गई | किसानों से झूठे वादे कर सरकार बनाकर उनके साथ छल किया जा रहा है मध्य प्रदेश में धान खरीदी पर मूल्य वृद्धि छत्तीसगढ़ राजस्थान की तर्ज पर क्यों नहीं की जा रही है | क्षेत्रीय विधायकों द्वारा एेरा मवेसी प्रथा बंद कर किसानों को राहत देने का कार्य क्यों नहीं किया जा रहा है | सरकार के कारनामे देखकर मालूम पड़ता है कि आगे पूर्व की योजनाओं को भी बंद किया जा सकता है |बेरोजगारी, महंगाई, भ्रष्टाचार एवं कर्जदार देश एवं मध्य प्रदेश की जनता खुद समझ सकती है |
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