दस दिवसीय पर्युषण पर्व का नौवां दिन

परिग्रह का पूर्णरूप से त्याग करना हीं आकिंचन धर्म- ब्रह्मचारी सुमत भैया
जैन समाज के एम पी जैन ने बताया कि पर्युषण पर्व में आत्मा के दस स्वभाव पर कैसे विजय पाया जाए इसी को बताया जाता है। पर्युषण पर्व का नौवां दिवस ‘उत्तम आकिंचन्य’ नामक दिवस है. दस दिवसीय जैन पर्युषण पर्व के नौवें दिन उत्तम आकिंचन्य धर्म की पूजा की गई. पटना के मीठापुर, कदमकुआँ, मुरादपुर, कमलदह मंदिर गुलजार बाग सहित सभी दिगम्बर जैन मंदिरों में आकिंचन्य धर्म की पूजा की गयी. सभी दिगम्बर जैन मंदिरों में सुबह से हीं पूजा करने हेतु श्रद्धालु मंदिरों में पहुँचने लगे. मंदिरों में श्रद्धालुओं ने भगवान् का अभिषेक किया एवं शांतिधारा के बाद दशलक्षण पूजन में आकिंचन्य धर्म की पूजा की गयी. एम पी जैन ने बताया कि मिठापुर दिगम्बर जैन मंदिर में भोपाल से पधारे ब्रह्मचारी सुमत भैया ने आकिंचन्य धर्म की पूजा करवाई। ब्रह्मचारी जी ने बताया कि उत्तम आकिंचन धर्म कहता है कि ना मैं किसी का, ना कोई मेरा. धर्म आकिंचन नाम इसी का। दुःख का मूल कारण परिग्रह है। शास्त्रों में कहा है कि फॉंस तनक सी तन में सालै, चाह लंगोटी की दुःख भालै। अर्थात् किसी भी वस्तु की चाह मनुष्य के मन को चिंतित कर देती है। मन का चिंतन बार-बार वहीं पर पहुच जाता है, जो वस्तु उसे प्राप्त करना है। जितना ज्यादा परिग्रह होगा व्यक्ति उतना दुःखी रहेगा। उसको रखने का, छुपाने का जतन करेगा कि कहीं इनकम टैक्स वाले, चोर, लुटेरे धन को ले ना जायें। श्री पार्श्वनाथ दिगम्बर जैन मंदिर, कदमकुआं में आकिंचन्य धर्म की पूजा कराते हुए पंडित डॉ शीतल जैन शास्त्री ने बताया कि “उत्तम आकिंचन का अर्थ है – जो दिख रहा है वह सब छूटने वाला है।“ ‘राजा हो या रंक, सन्त हो या फकीर, सबको मौत आयेगी। ‘खाली हाथ आया है और खाली हाथ जायेगा। ‘जो हमने जोड़ा है, वो सब यहीं छूट जायेगा। अप्राप्त के लिये ही हम अपना सारा जीवन दांव पर लगा देते हैं। स्वयं को समझना ही उत्तम आकिंचन धर्म है। उत्तम आकिंचन धर्म का मतलब है- कुछ भी जोड़ लो, साथ कुछ भी नहीं जायेगा, सिर्फ साथ जायेगा – धर्म, सत्संग, पुण्य, सेवा सत्कार और परोपकार…!!!..
एम पी जैन ने बताया कि पर्युषण पर्व के अंतिम दिन शुक्रवार को ब्रह्मचर्य व्रत की पूजा की जायेगी. साथ हीं कल जैन धर्म के बारवें तीर्थंकर भगवान बासुपुज्य के निर्वाण दिवस पर पटना के सभी दिगम्बर जैन मंदिरों में श्रद्धालु निर्वाण लाडू चढ़ायेंगें.
एम पी जैन