अब नहीं रहा अधिकारी कर्मचारियों में ‘एसडीएम’, “कलेक्टर” का खौफ

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सीधी : नए डीएम अभिषेक सिंह के चार्ज लेते ही प्रशासन का माहौल बदला सा नजर आने लगा था। डीएम ने चार्ज लेते ही शासन की प्राथमिकता वाली योजनाओं और फरियादियों की समस्याओं का समय रहते निराकरण कराने पर जोर देने की सीख मातहतों को दी थी। इसका असर अगले ही दिन कलक्ट्रेट से लेकर विकास भवन तक दिखाई दिया था । कलेक्टर भले ही उस समय लोकसभा चुनाव के मद्देनजर व्यस्त थे मगर इसके बाद भी मातहत काम पर ध्यान देते दिखाई दिए। फरियादियों में भी सिस्टम में बदलाव की उम्मीद दिखी थी, और देखते ही देखते सीधी जिले का नक्शा बदला सा नजर आ रहा था, मध्य प्रदेश में सीधी के कलेक्टर अभिषेक सिंह ने अपनी ज्वाइनिंग के 17 दिन में ही 36 शिक्षकों को निलंबित कर दिया था श्री सिंह ने 23 दिसंबर 2018 को बतौर कलेक्टर सीधी में पदभार ग्रहण किया था।
मेरे चैनल का उद्देश्य किसी सम्मानित व्यक्ति ऑफिसर का उपहास या निंदा करना नहीं है किंतु वास्तविक स्थिति तो यह है कि, वर्तमान समय में जिले के हालात कुछ ऐसे बन गए हैं जिसे ग्रामीण अंचल की बात तो दूर खुद जिले के ही अंतर्गत कार्यालयों में अधिकारी, कर्मचारियों के कर्य व्यवहार को देख कर सहज ही अंदाजा लगाया जा सकता है l शायद अब इन अफसरों के ऊपर कोई बड़े ऑफिसर नहीं रह गए या इन्हें अब सिस्टम का खौफ नहीं हैं l यदि कलेक्टर महोदय किसी भी विभाग में औचक निरीक्षण करें तो खुद ब खुद माजरा साफ नजर आएगा |
मध्य प्रदेश के किसी भी जिले में ऐसी स्थिति नहीं है कि विभागों में पर्याप्त मात्रा में कर्मचारी हों, कर्मचारियों की कमी भी समस्या का मूल कारण हो सकती है, सीधी जिले के सिहावल विकासखंड अंतर्गत अधिकांशत: प्रभारी अधिकारियों ने ही जिम्मेदारी का बींड़ा उठा रखा है |
प्राइड कदम हिंदी समाचार एवं प्राइड इंडिया न्यूज़ जिला क्राइम रिपोर्टर शाहिद खान |