टी.वी. हमारे साथ क्या करता है और हम टीवी के साथ क्या कर सकते हैं?

प्राइड कदम हिंदी मासिक पत्रिका एवं प्राइड इंडिया न्यूज़ सीधी (मध्य प्रदेश) संवाददाता शाहिद खान

0 1,339

बुद्धू बक्से की गुलाम होती दुनिया

बहुत से घरों में अधिकांश समय टी.वी. चलता ही रहता है l हमारे चारों ओर की दुनिया के बारे में बहुत से विचार, जो कुछ हम टीवी पर देखते हैं, उसी से बनते हैं l यह दुनिया को देखने वाली एक खिड़की की तरह है l आपके विचार में यह हमें कैसे प्रभावित करता है? टी.वी. में अनेक प्रकार के कार्यक्रम हैं – सास भी कभी बहू थी जैसे पारिवारिक धारावाहिक, खेल कार्यक्रम जैसे कौन बनेगा करोड़पति, वास्तविक जीवन को दर्शाने वाले कार्यक्रम जैसे -बिग बॉस, समाचार, खेल और कार्टून आदि l हर कार्यक्रम के पहले, बीच में और अंत में विज्ञापन होते हैं, क्योंकि टी.वी. का समय बहुत महंगा होता है l इसलिए केवल वही कार्यक्रम दिखाए जाते हैं जो अधिक दर्शकों को आकर्षित कर सकें l आपके विचार में ऐसे कौन – से कार्यक्रम हो सकते हैं ? उन चीजों के बारे में सोचिए जो टी.वी. में दिखाई जाती हैं या नहीं दिखाई जाती l टी.वी. हमें अमीरों के जीवन के बारे में अधिक दिखाता है या गरीबों के?

हमें यह सोचने की जरूरत है कि टी.वी. का हम पर क्या प्रभाव पड़ता है l यह दुनिया के बारे में हमारे दृष्टिकोण, हमारे विश्वास, हमारे रुख और मूल्यों को कैसे बनाता है l हमें यह समझने की जरूरत है कि यह हमें संसार का अधूरा दृश्य ही दिखाता है l अपनी पसंद के कार्यक्रमों का आनंद लेते हुए भी हमें यह नहीं भूलना चाहिए कि टी.वी. के पर्दे से हटकर भी एक उत्कृष्टता भरा बड़ा संसार है l दुनिया में ऐसा बहुत कुछ हो रहा है, जिसकी ओर टी.वी. ध्यान नहीं देता है l फिल्म स्टारों, सुप्रसिद्ध व्यक्तियों, और धनाढ्य जीवन शैलियों से परे भी ऐसा संसार, है जहां हम सबको पहुंचना चाहिए और विभिन्न प्रकार से अपनी प्रतिक्रिया व्यक्त करनी चाहिए l हमें ऐसी जगह दर्शक बनना चाहिए, जो कार्यक्रम का आनंद भी लें और देखे गए और सुने गए प्रसंगों पर प्रश्न भी उठाएं l

Web TV

अगली ख़बर

Leave a comment