Janmashtami 2021: इंदौर में विभिन्न मत-पंथ मानने वाले प्राचीन मंदिरों की खास है पूजन परंपरा

Janmashtami 2021: इंदौर । शहर के विभिन्न पंथ और मत को मानने वाले प्राचीन कृष्ण मंदिर कृष्ण भक्तों के बीच आकर्षण का केंद्र है। कही 400 साल पुराने ग्रंथ को राधा-कृष्ण का स्वरूप दिया गया है तो कही रानी को अपने आराध्य के दर्शन हो इसलिए मंदिर का निर्माणकर बांके बिहारी को प्रतिष्ठित किया गया है। इतना ही नहीं कृष्ण जन्म मनाने के लिए कही तिथि की महत्ता देखी जाती है तो कही सुर्योदय में रोहणी नक्षत्र के होने को महत्व दिया जाता है। इसके चलते कृष्ण जन्म मंदिरों में अलग-अलग दिन मनाए जाते हैं। साथ ही इन मंदिरों में भगवान की पूजन पद्धति और भगवान के लगने वाले भोग भी खास है।
महानुभाव पंथ : मेरे तो गिरधर गोपाल दूसरा न कोई
राजवाड़ा पर स्थित बांके बिहारी मंदिर महानुभाव पंथ को मानने वाले लोगों के बीच आस्था का केंद्र है। इस मंदिर का निर्माण शहर के ख्यात गोपाल मंदिर जो कि 1832 में बना था उसके पूर्व इसका निर्माण किया गया था। तपस्विनी विमलाबाईजी विराट बताती है कि देवालय में कृष्ण भगवान की तीन श्याम वर्णी कसौटी पत्थर की मूर्तियां है। इसके अलावा पालने में बांके बिहारी और एवं दत्तात्रेय की छोटी मूर्तियां है। इस पंथ को मानने मीरा की तरह भक्ति करते है जैसे मेरे तो गिरधर गोपाल दूसरा न कोई । इस पंथ में एक युग में एक भगवान की पूजा करते हैं। द्वापर भगवान कृष्ण को अवतारी पुरुष मानकर उनका पूजन किया जाता है। जन्माष्टमी पर महाआरती के साथ ही छप्पनभोग लगाकर पूजन किया जाता है।
शहर के पश्चिम क्षेत्र के गोराकुंड में स्थित प्रणामी संप्रदाय के राधाकृष्ण मंदिर सांप्रदायिक सौहार्द्र का संदेश देता है। यहां गीता के श्लोक और कुरान की आयते लिखे ग्रंथों को राधाकृष्ण का स्वरूप देकर पूजन किया जाता है। इसमें एक ग्रंथ के रूप में गीता और दूसरा ग्रंथ प्रणामी संप्रदाय के संस्थापक गुरु प्राणनाथ द्वारा लिखा गया है। इसमें कुरान की आयते भी लिखी गई है। पूजनकर पान का भोग लगाया जाता है। पुजारी कमल तिवारी बताते है कि 98 साल पुराने मंदिर में 400 साल पुराने ग्रंथ है। रात 12 बजे जन्माष्टमी पर महाआरती की जाएगी।
वैष्णवमत को मानने वाले 230 साल पुराने राजवाड़ा स्थित यशोदा माता मंदिर में संतान की इच्छुक महिलाओं का जन्माष्टमी पर मेला लगता है। जन्माष्टमी और उसके अगले दिन यहां गोद भराई की रस्म होती है। महिला विधिवत तरीके से पूजन कर यशोदा माता से प्रार्थना करती है कि जैसे संतान की आपको प्राप्ती हुई हमें भी संतान मिले। इन दो दिनों में जिन महिलाओं को पुजन का अवसर नहीं मिल पाता वह अगामी दिनों में पूजन के लिए आती है। पुजारी मनोहर दीक्षित बताते है कि माता यशोदा की गोद में अठखेलिया करते कन्हैया की मूर्ति है। जन्माष्टमी उदयाकाल में अष्टमी तिथि हो उस दिन मनाई जाती है। रात 12 बजे जन्म आरती होती है।
जहां शहरभर में 30 अगस्त को जन्माष्टमी मनेगी वहीं 135 साल पुराने रामानुजकोट मंदिर यशवंतगंज में जन्म उत्सव एक दिन बाद 31 अगस्त को होगा। एेसा उत्सव मनाने के लिए संप्रदाय में नक्षत्र की प्रधानता का महत्व होना है। मंदिर दक्षिण भारत में बने साढ़े चार फीट उंची पाषण की पाषण की प्रतिमा है। मंदिर के विजयाचार्य महाराज बताते है कि जन्माष्टमी पर भगवान कृष्ण का काष्ट से बने शेषनाग वाले झूले पर झूलाया जाता है। इस दिन शाम 6 बजे एकांत अभिषेक और रात 11 बजे स्त्रोत पाठ होगा। इसके बाद रात 12 बजे जन्म आरती की जाएगी।