सीधी-टिकरी,मड़वास सड़क के उड़े परखच्चे, गड्ढों में तब्दील हुआ करोड़ों के कारोबार का रास्ता!

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सिंगल सड़क, भारी ट्रैफिक और कटी हुई पटरियां बनीं जानलेवा—बड़े वाहन साइड लें तो हादसे का खतरा, जिम्मेदार मौन

 

सीधी। सीधी-मड़वास मार्ग इन दिनों अपनी बदहाली पर आंसू बहा रहा है। कुछ महीने पहले डामरीकरण के बाद जिस सड़क को बेहतर आवागमन की उम्मीद जगी थी, वही सड़क अब जगह-जगह उखड़कर गड्ढों में तब्दील होती नजर आ रही है। ऊपर से भारी बारिश ने सड़क के दोनों ओर की पटरियों को काट दिया है। ऐसे में यह मार्ग अब सामान्य सड़क कम और हादसे के खतरे वाला रास्ता ज्यादा नजर आ रहा है।

 

1. सिंगल सड़क, दो तरफ भारी वाहन—साइड देना बना जोखिम

सीधी-मड़वास मार्ग सिंगल सड़क होने के कारण जब दो बड़े वाहन आमने-सामने आते हैं तो साइड देने में चालक को सड़क के किनारे उतरना पड़ता है। ओवरटेक करना खतरे से खाली नहीं हो सकता है,।बारिश से दोनों तरफ की मिट्टी कट चुकी है, ऐसे में वाहन पटरी से नीचे उतरा तो पलटने की आशंका बनी रहती है।

 

2. कुछ महीने पहले डामरीकरण, अब फिर उखड़ने लगी सड़क

स्थानीय लोगों के अनुसार सड़क पर कुछ महीने पहले ही डामरीकरण कराया गया था। लेकिन अब कई हिस्सों में डामर उखड़ चुका है और सड़क पर गड्ढे दिखाई दे रहे हैं। इससे निर्माण की गुणवत्ता और रखरखाव को लेकर सवाल खड़े हो रहे हैं।

 

3. भारी बारिश ने बढ़ाई परेशानी

बारिश के कारण सड़क के दोनों ओर की पटरियां कट गई हैं। सड़क और पटरी के बीच कई जगह गहरी कटान दिखाई देती है। बड़े वाहनों के लिए यह स्थिति बेहद खतरनाक साबित हो सकती है।

 

4. अदाणी प्लांट की आवाजाही का भी महत्वपूर्ण रास्ता

इस मार्ग पर अदाणी प्लांट की ओर आने-जाने वाले भारी वाहनों का दबाव भी रहता है। ऐसे में पहले से संकरी सड़क पर भारी वाहनों की आवाजाही सड़क की स्थिति को और चुनौतीपूर्ण बना रही है।

 

5. सिंगरौली जाने वाला महत्वपूर्ण संपर्क मार्ग

सीधी से सिंगरौली की ओर जाने वाले आवागमन के लिए भी यह मार्ग महत्वपूर्ण कड़ी है। कोयला कारोबार और औद्योगिक गतिविधियों से जुड़े वाहनों की आवाजाही के चलते यहां ट्रैफिक का दबाव बना रहता है।

 

6. बालू खदानों का दबाव भी सड़क पर

सीधी-टिकरी मुख्य मार्ग से रीवा और उत्तर प्रदेश की ओर बालू परिवहन होने के कारण भारी वाहनों का दबाव इस पूरे क्षेत्र में रहता है। स्थानीय लोगों का कहना है कि सड़क की क्षमता और वर्तमान ट्रैफिक दबाव के बीच बड़ा अंतर दिखाई देता है।

 

7. ट्रैफिक ज्यादा, सड़क कमजोर—खतरा लगातार बढ़ रहा

एक तरफ भारी वाहनों का दबाव और दूसरी तरफ सड़क पर गड्ढे। ऊपर से दोनों किनारों की कटी हुई पटरियां। ऐसे हालात में वाहन चालकों के सामने सुरक्षित रास्ता चुनने का विकल्प ही सीमित हो जाता है।

 

8. पहले भी हो चुकी हैं दुर्घटनाएं

स्थानीय स्तर पर इस मार्ग पर पूर्व में दुर्घटनाएं होने और लोगों की जान जाने की बातें सामने आती रही हैं। ऐसे में सड़क की मौजूदा स्थिति को नजरअंदाज करना भविष्य में किसी बड़ी घटना का कारण बन सकता है।

 

‘कमाई का रास्ता’ या जनता के लिए जोखिम का रास्ता?

 

विडंबना यह है कि जिस मार्ग पर औद्योगिक गतिविधियों, कोयला कारोबार, बालू परिवहन और भारी वाहनों की आवाजाही के कारण लगातार दबाव बना रहता है, उसी मार्ग की हालत बदहाल होती जा रही है।

 

स्थानीय लोगों का सवाल सीधा है—जब इस सड़क से सरकार और संबंधित व्यवस्थाओं को राजस्व व आर्थिक गतिविधियों का लाभ मिलता है, तो सड़क की सुरक्षा और मजबूती की जिम्मेदारी कौन उठाएगा?

 

आज यह सड़क केवल सीधी-मड़वास के बीच का रास्ता नहीं रह गई है। यह सिंगरौली, रीवा और आगे उत्तर प्रदेश तक के आवागमन से जुड़ी महत्वपूर्ण कड़ी बन चुकी है। भारी ट्रैफिक के हिसाब से इसकी सुरक्षा व्यवस्था और सड़क की क्षमता पर गंभीरता से विचार करने की जरूरत है।

 

गड्ढे से पटरी, पटरी से हादसा और हादसे से मौत—कौन लेगा जिम्मेदारी?

 

सबसे बड़ा खतरा यही है कि साइड लेते समय कोई भारी वाहन सड़क की कटी हुई पटरी पर चला जाए। वाहन का संतुलन बिगड़ा तो वह पलट सकता है और सामने से आने वाले वाहन भी उसकी चपेट में आ सकते हैं।

 

सवाल सिर्फ सड़क के गड्ढों का नहीं है, सवाल लोगों की जिंदगी का है।

 

जिम्मेदार विभाग कब जागेगा?

 

क्या प्रशासन किसी बड़े हादसे का इंतजार कर रहा है?

क्या सड़क की मरम्मत दुर्घटना के बाद ही होगी?

क्या कटी हुई पटरियों को हादसा होने से पहले सुरक्षित किया जाएगा?

क्या कुछ महीने पहले हुए डामरीकरण की गुणवत्ता की जांच होगी?

और सबसे बड़ा सवाल—इतने भारी ट्रैफिक के बावजूद इस मार्ग की सुरक्षा को लेकर ठोस कदम कब उठाए जाएंगे?

 

आम जनता की मांग है कि सड़क की तत्काल जांच कर गड्ढों की मरम्मत, कटी हुई पटरियों का भराव और आवश्यकतानुसार सड़क का चौड़ीकरण कराया जाए, ताकि यह महत्वपूर्ण मार्ग किसी बड़े हादसे का कारण न बने।

 

अब जरूरत कार्रवाई की है, सिर्फ आश्वासन की नहीं।

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