शहपुरा अस्पताल में निजी प्रैक्टिस के आरोप, बीएमओ के खिलाफ उच्चस्तरीय जांच की मांग

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(जिला ब्यूरो मनोज कुमार यादव) | डिंडौरी/शहपुरा

 

डिंडौरी जिले के शहपुरा सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र के प्रभारी खंड चिकित्सा अधिकारी डॉ. रत्नेश कुमार द्विवेदी के खिलाफ अस्पताल परिसर में कथित रूप से निजी मरीजों का उपचार करने सहित कई गंभीर आरोप लगाए गए हैं। मामले को लेकर ग्राम गुरैया निवासी तीरथ प्रसाद झारिया ने मुख्यमंत्री, जबलपुर संभाग आयुक्त, कलेक्टर डिंडौरी, एसडीएम शहपुरा और मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी को शिकायत भेजकर निष्पक्ष एवं उच्चस्तरीय जांच की मांग की है।

 

शिकायतकर्ता का आरोप है कि प्रभारी बीएमओ द्वारा शासकीय अस्पताल परिसर और शासकीय आवास में कथित रूप से निजी मरीजों को देखा जाता है। शिकायत में यह भी कहा गया है कि निर्धारित शासकीय ड्यूटी के दौरान निजी मरीजों का उपचार किए जाने से सरकारी स्वास्थ्य सेवाओं पर असर पड़ सकता है। शिकायतकर्ता ने इस संबंध में मध्यप्रदेश सिविल सेवा आचरण नियम, 1965 के नियम 16 सहित संबंधित शासन निर्देशों का हवाला देते हुए जांच की मांग की है।

 

शासकीय दवाओं को लेकर भी लगाए आरोप

 

शिकायत में अस्पताल में उपलब्ध नि:शुल्क दवाओं को लेकर भी सवाल उठाए गए हैं। आरोप लगाया गया है कि मरीजों को कथित रूप से शासकीय दवाओं के संबंध में नकारात्मक या भ्रामक जानकारी देकर बाहर से दवाएं खरीदने के लिए कहा जाता है। शिकायतकर्ता ने निजी दवा दुकानों से कथित कमीशन अथवा आर्थिक लेन-देन की भी जांच किए जाने की मांग की है।

 

सरकारी जांच सुविधाओं के बजाय निजी जांच कराने का आरोप

 

शिकायत में शासकीय अस्पताल में उपलब्ध जांच सुविधाओं को लेकर भी गंभीर आरोप लगाए गए हैं। इसमें दावा किया गया है कि मरीजों को कथित रूप से सरकारी जांच सुविधाओं की कमियां बताकर निजी स्तर पर जांच कराने के लिए प्रेरित किया जाता है। शिकायतकर्ता ने अस्पताल में उपलब्ध जांच व्यवस्था और मरीजों को दी जा रही सलाह की स्वतंत्र जांच कराने की मांग की है।

 

निजी क्लीनिक के पंजीयन पर भी उठाए सवाल

 

शिकायतकर्ता ने शासकीय अस्पताल परिसर में कथित निजी क्लीनिक के संचालन की वैधानिकता पर भी सवाल उठाए हैं। इसके लिए मध्यप्रदेश उपचर्या तथा रुजोपचार संबंधी स्थापनाएं (रजिस्ट्रीकरण तथा अनुज्ञापन) अधिनियम, 1973 का हवाला देते हुए क्लीनिक के पंजीयन और संचालन से जुड़े दस्तावेजों की जांच की मांग की गई है।

 

आय और संपत्ति की जांच की मांग

 

शिकायत में पिछले करीब पांच वर्षों के दौरान कथित निजी प्रैक्टिस से प्राप्त आय की भी जांच की मांग की गई है। शिकायतकर्ता ने पूर्व वर्षों के आयकर रिटर्न, बैंक खातों और चल-अचल संपत्तियों की जांच कराने की मांग करते हुए संबंधित वित्तीय लेन-देन को भी जांच के दायरे में शामिल करने की मांग की है।

 

नियमों और न्यायालयीन आदेशों का हवाला

 

शिकायतकर्ता ने अपने आवेदन में मध्यप्रदेश शासन के विभिन्न जीएडी सर्कुलर, शासकीय आवास संबंधी नियम, मध्यप्रदेश सिविल सेवा आचरण नियम 1965 के नियम 16 तथा चिकित्सा प्रतिष्ठानों के पंजीयन संबंधी कानून का उल्लेख किया है। साथ ही 10 दिसंबर 2024 के एक न्यायालयीन निर्णय का हवाला देते हुए संबंधित नियमों के तहत कार्रवाई की मांग की गई है।

 

शिकायतकर्ता की मांग है कि पूरे मामले की निष्पक्ष जांच किसी सक्षम एवं स्वतंत्र स्तर से कराई जाए। यदि जांच में आरोप सही पाए जाते हैं तो संबंधित अधिकारी के खिलाफ विभागीय एवं कानूनी प्रावधानों के तहत कार्रवाई की जाए। साथ ही कथित निजी उपचार, मरीजों से ली गई राशि, दवा खरीद और निजी जांच से जुड़े वित्तीय लेन-देन की भी जांच कराने की मांग की गई है।

 

हालांकि, शिकायत में लगाए गए आरोपों की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हुई है। मामले में संबंधित बीएमओ अथवा स्वास्थ्य विभाग का आधिकारिक पक्ष सामने आने के बाद ही आरोपों की वास्तविक स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।

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