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विलुप्ति की कगार पर पक्षी जगत — मानव गतिविधियाँ बनी सबसे बड़ा खतरा

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आर,डी, पाण्डेय

आज प्रकृति का संतुलन मनुष्य की स्वार्थपूर्ण गतिविधियों के कारण गंभीर संकट में है। वनों की अंधाधुंध कटाई, बढ़ता प्रदूषण और जलवायु परिवर्तन ने पक्षियों के अस्तित्व पर गहरा आघात पहुँचाया है। कभी सुबह-सुबह जिनकी चहचहाहट से वातावरण गूँज उठता था, आज वे मधुर स्वर धीरे-धीरे मौन में बदलते जा रहे हैं।

 

पक्षी केवल प्रकृति की सुंदरता ही नहीं बढ़ाते, बल्कि पारिस्थितिकी तंत्र के महत्वपूर्ण स्तंभ भी हैं। कीटनाशकों का बढ़ता उपयोग उनकी संख्या में तेजी से कमी ला रहा है, वहीं पेड़ों की कमी से उनके प्राकृतिक आवास और घोंसले उजड़ते जा रहे हैं। मनुष्य की संवेदनहीनता आज उनके अस्तित्व पर सबसे बड़ा संकट बनकर उभरी है।

 

विशेषज्ञों का मानना है कि यदि समय रहते संरक्षण के ठोस उपाय नहीं किए गए, तो आने वाली पीढ़ियाँ पक्षियों को केवल पुस्तकों और तस्वीरों में ही देख पाएँगी। ऐसे में सरकार और समाज दोनों की संयुक्त जिम्मेदारी है कि वे पक्षी संरक्षण की दिशा में प्रभावी कदम उठाएँ।

पक्षियों का संरक्षण ही वास्तव में मानवता और प्रकृति की सच्ची रक्षा है।

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