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मध्यप्रदेश के भ्रष्ट कर्मचारियों एवं भ्रष्ट विभागों से जनता के भरोसे पर लग रही चोट

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सीधी(राकेश शर्मा)

 

मध्यप्रदेश में भ्रष्टाचार लगातार एक गंभीर मुद्दा बना हुआ है। राज्य सरकार की कई एंटी-करप्शन कार्रवाइयों और लोकायुक्त छापों के बावजूद, कुछ विभाग ऐसे हैं जहां रिश्वतखोरी और घूसखोरी की शिकायतें सबसे अधिक सामने आती हैं।राजस्व विभाग में पटवारी और तहसील स्तर पर जमीन संबंधी कार्यों में भ्रष्टाचार की नदी बहती है।नामांतरण, खसरा-खतौनी और नक्शा निकलवाने तक के लिए आम नागरिकों का बिना रिश्वत के काम ही नहीं होता।

पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग में रोजगार सहायक और सचिव विकास योजनाओं के फंड की खूब बंदरबांट कर लेते हैं। मनरेगा और प्रधानमंत्री आवास योजना में भी भ्रष्टाचार के मामलों से पंचायतें शिशक रही हैं।लोक निर्माण विभाग में (PWD)सड़क और भवन निर्माण कार्यों में ठेकेदारों द्वारा घटिया निर्माण सामग्री के इस्तेमाल से सरकारी धन भ्रष्टाचार की नाली में बहता रहता है।

 

शिक्षा विभाग में ट्रांसफर से लेकर पोस्टिंग में लेन-देन और शैक्षणिक सामग्री की आपूर्ति में अनियमितताएं इस विभाग को भी बदनाम कर चुकी हैं।

बिजली विभाग में भी भ्रष्टाचार का करंट दौड़ता है। कोई भी काम बिना न्योछावर के होता ही नहीं। बिजली विभाग उपभोक्ताओं को जोर का झटका देने में माहिर है। गलत बिलिंग और अनियमितताओं से बिजली उपभोक्ता परेशान एवं खिसियाये से नजर आते हैं।

 

आम जनता का कहना है कि जब तक भ्रष्ट कर्मचारियों पर कठोर कार्रवाई और पारदर्शी व्यवस्था लागू नहीं की जाएगी, तब तक भ्रष्टाचार *सुरसा* की तरह अपना मुंह फैलाता ही जाएगा और “भ्रष्टाचार मुक्त मध्यप्रदेश” सिर्फ एक नारा ही बना रहेगा।

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